अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच चीन और रूस ने बढ़ाई अपनी मैत्री संधि

बीजिंग : अमेरिका और यूरोप की बढ़ती एकजुटता के मद्देनजर रूस और चीन ने 20 साल पुरानी अपनी मैत्री संधि को फिर उतनी ही अवधि के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई वार्ता में यह फैसला किया गया।

विदित हो कि हाल ही में जी-7 देशों के शिखर सम्मेलन और नाटो समिट में अमेरिका और यूरोप ने मानवाधिकार हनन और लोकतांत्रिक मूल्यों के दमन के मसलों पर चीन और रूस को घेरा था।

वीडियो लिंक के जरिये वार्ता के बाद चिनफिंग और पुतिन ने संयुक्त बयान जारी किया। दोनों ने चीन-रूस के बीच अच्छे पड़ोसी और मित्रतापूर्ण सहयोग संधि को बढ़ाने की घोषणा की।

दोनों देशों के बीच यह संधि 2001 में 20 साल के लिए हुई थी। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे से लगी अपनी सीमाओं पर सैन्य तैनाती भी बहुत कम कर दी थी। इसका दोनों को लाभ हुआ था। साथ ही अमेरिका से मुकाबले में मदद मिली थी।

समझौते का यह नवीनीकरण पुतिन की अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ 16 जून को हुई मुलाकात के बाद बीजिंग में पैदा हुई बेचैनी के बीच हुआ है। माना जा रहा है कि पुतिन से मुलाकात का बाइडन का एक उद्देश्य रूस को चीन से दूर करना भी था।

सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के सौ साल पूरे होने के मौके पर एक जुलाई से आयोजित होने वाले समारोह से पहले रूस के साथ समझौते का नवीनीकरण जाहिर तौर पर चिनफिंग को और मजबूत करेगा। चिनफिंग ने पुतिन से कहा है कि दोनों देश मिलकर दुनिया में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेंगे।

इससे पूरी दुनिया लाभान्वित होगी। इससे मानव विकास को मदद मिलेगी। दोनों देशों ने सहयोग का अनुपम उदाहरण दुनिया के समक्ष प्रस्तुत किया है। जबकि पुतिन ने कहा है कि इस समझौते से दुनिया में स्थिरता बढ़ेगी। 

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