एयर इंडिया को खरीदने के लिए सामने आए दो खरीददार, टाटा संस और स्पाइस जेट के चेयरमैन ने लगाई बोली

नई दिल्ली : टाटा संस ने सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के लिए वित्तीय बोली लगाई है। कंपनी के लिए वित्तीय बोली लगाने की समय सीमा बुधवार को खत्म हो गई।

टाटा संस के प्रवक्ता ने कंपनी के लिए वित्तीय बोली लगाने की पुष्टि की। वित्तीय बोली की समय सीमा खत्म होने के बाद निवेश व लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने ट्वीट कर कहा कि लेनदेन सलाहकार को एयर इंडिया के लिए बहुत सी वित्तीय बोलियां मिली हैं।

यह प्रक्रिया अब समापन के चरण में पहुंच गई है। एयर इंडिया की स्थापना टाटा एयरलाइंस के रूप में टाटा ने ही की थी। वर्तमान में घरेलू एयरपोर्ट्स पर कंपनी के 4,400 राष्ट्रीय और 1,800 अंतरराष्ट्रीय लैंडिंग व पार्किंग स्लाट हैं। इसके अलावा दुनियाभर के एयरपोर्ट्स पर कंपनी के लिए 900 स्लाट आवंटित हैं।

सरकार एयर इंडिया में अपनी 100 फीसद हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में है। इसमें एआइ एक्सप्रेस लिमिटेड में एयर इंडिया की 100 फीसद तथा एयर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में कंपनी की 50 फीसद हिस्सेदारी भी शामिल है। सरकार ने कंपनी की बिक्री प्रक्रिया पिछले वर्ष जनवरी में ही शुरू कर दी थी।

लेकिन कोरोना संकट के चलते कई बार इसकी विभिन्न प्रक्रियाओं की समय सीमा बढ़ाई गई। माना जा रहा था कि इस बार भी कंपनी के लिए वित्तीय बोली लगाने की समय सीमा बढ़ाई जा सकती है।

लेकिन पिछले दिनों सरकार ने जोर देकर कहा था कि इस बार यह अवधि नहीं बढ़ाई जाएगी। एयर इंडिया के विनिवेश के प्रयास वर्ष 2017 से हो रहे हैं, लेकिन इसमें लगातार अड़चनें आती रहीं।

इसे देखते हुए पिछले वर्ष अक्टूबर में सरकार ने कंपनी का कर्ज नए निवेशक को हस्तांतरित करने संबंधी नियमों में ढील दी। एयर इंडिया के लिए पिछले वर्ष जनवरी में जारी अभिरुचि पत्र (ईओआइ) के अनुसार 31 मार्च, 2019 तक कंपनी पर 60,074 करोड़ रुपये का कर्ज था।

इसमें से नए खरीदार को 23,286.5 करोड़ रुपये का बोझ अपने ऊपर लेना होगा। कंपनी का बाकी कर्ज एक एयर इंडिया असेट्स होल्डिंग लिमिटेड (एआइएएचएल) नामक स्पेशल परपस व्हीकल (एसपीवी) को सौंपा जाएगा।

टाटा ग्रुप में कोई संरचनात्मक बदलाव नहीं : टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बुधवार को कहा कि कंपनी के नेतृत्व में कोई संरचनात्मक बदलाव नहीं हो रहा है। टाटा संस में नियंत्रक हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन रतन टाटा ने एक अलग बयान में कहा कि कंपनी के नेतृत्व में संरचनात्मक बदलाव के कयास की खबरों से उन्हें बेहद निराशा हुई है। पिछले दिनों ऐसी खबरें आई थीं कि कारपोरेट गवर्नेंस में सुधार के लिए टाटा संस के नेतृत्व में ऐतिहासिक बदलाव के तहत सीईओ पद के गठन पर विचार हो रहा है

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