ट्रेन विस्फोट मामले में तीन महीने में आरोपित के खिलाफ तय हों आरोप : सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के अजमेर में विशेष टाडा अदालत को निर्देश दिया कि आरोपित के खिलाफ तीन महीने के भीतर आरोप तय किए जाएं। आरोपित को 1993 में कई राजधानी एक्सप्रेस और अन्य रेलगाड़ियों में सिलसिलेवार विस्फोटों के लिए 11 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई है।

शीर्ष अदालत ने हमीर-उइ-उद्दीन की जमानत याचिका लंबित रखी और कहा कि उसके खिलाफ आरोप तय होने के बाद इस पर विचार किया जाएगा।

उसे 2010 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बीवी नागरत्न ने सीबीआइ से कहा कि मामले में आरोप तय करने और सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए गाजियाबाद की जेल में बंद सैयद अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को विशेष अदालत में पेश करने की व्यवस्था की जाए। शीर्ष अदालत ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख दस दिसंबर तय की। हमीर-उई-उद्दीन की पैरवी कर रहे वकील शोएब आलम ने कहा कि वर्तमान मामले के तथ्य निराश करने वाले हैं और इस चरण में याचिकाकर्ता निर्दोष है, क्योंकि सुनवाई हुई ही नहीं है।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पांच-छह दिसंबर, 1993 को मुंबई से नई दिल्ली, नई दिल्ली से हावड़ा और हावड़ा से नई दिल्ली जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस तथा सूरत-बड़ौदा फ्लाइंग क्वीन एक्सप्रेस एवं हैदराबाद-नई दिल्ली एपी एक्सप्रेस में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे। विस्फोट में दो यात्रियों की जान चली गई और 22 अन्य घायल हुए थे। कोटा, वलसाड, कानपुर, इलाहाबाद और मलकाज गिरी में अलग-अलग मामले दर्ज हुए थे। 

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