शिमला में विधानसभा के बाहर गरजे एचआरटीसी पैंशनर्ज व प्रकाशक संघ, जानिए क्या है वजह

शिमला : हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग पर किताब खरीद में लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले को लेकर विवाद तेज हो गया है।आरोपों पर जांच न होने से नाखुश प्रकाशकों ने उत्तर-मध्य भारत हिंदी प्रकाशक संघ और अखिल भारतीय हिंदी प्रकाशक संघ के संयुक्त आह्वान पर विधानसभा के बाहर धरना प्रदर्शन किया।

देशभर से करीब 100 प्रकाशक शिमला पहुंचे थे। प्रकाशक संघ का प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिला व उन्हें ज्ञापन सौंप निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

गौरतलब है कि किताब खरीद के लिए समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) के परियोजना निदेशक ने मार्च माह में विभिन्न प्रकाशकों और अधिकृत वितरकों से किताबों के सैंपल मांगे थे। करीब 863 प्रकाशकों और वितरकों ने परियोजना निदेशक को किताबों के नमूने भेजे थे, लेकिन 49 प्रकाशकों और वितरकों की किताबों का ही चयन हुआ।

प्रकाशकों का आरोप है कि किताब खरीदने में चहेतों को लाभ पहुंचाया गया। विवाद सामने आने पर शिक्षा विभाग ने किताबों की खरीद पर रोक लगा दी। बाद में शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर ने एसएसए को क्लीनचिट दे दी। इसी को लेकर बुधवार को प्रदर्शन किया गया।

इस दौरान उत्तर-मध्य भारत हिंदी प्रकाशक संघ के संरक्षक सत्य प्रकाश सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि किताब खरीद की इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार हुआ है। चुनिंदा प्रकाशकों को खरीद प्रक्रिया में लाभ पहुंचाने के लिए यह ताना बाना बुना गया है। वाणी प्रकाशन समूह के संचालक अरुण माहेश्वरी ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है कि अनियमितता के सारे तथ्य मौजूद होने के बावजूद इस मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है।

उत्तर-मध्य हिंदी प्रकाशक संघ के उपाध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि शिक्षा विभाग ने नियोजित तरीके से अनियमितता का ताना बाना रचा है। अखिल भारतीय हिंदी प्रकाशक संघ के उपाध्यक्ष आरके यादव ने कहा कि शिक्षा सचिव को पत्र लिख शिकायत की थी, मगर उन्होंने मिलने का समय नहीं दिया।

सत्य प्रकाश सिंह ने कहा कि गुरुवार को इस मामले को लेकर संघ अब विजिलेंस को शिकायत भेजेगा। यदि उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होती तो संघ शिमला में एक शव यात्रा निकालेगा। शासन व प्रशासन की सद्बुद्धि के लिए दानपुण्य भी किया जाएगा।

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