इस्लामाबाद : दशकों से आतंक को पालने-पोसने वाले पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 14 जुलाई को बस पर हुए हमले के लिए भारत और अफगानिस्तान को दोषी ठहराया है।
इस हमले में नौ चीनी इंजीनियरों समेत 13 लोग मारे गए थे। शटल बस में यह विस्फोट अपर कोहिस्तान जिले के दासू में हुआ था जहां चीन की कंपनी सिंधु नदी पर 4,300 मेगावाट की पनबिजली परियोजना पर कार्य कर रही है।
यह बस चीन के इंजीनियरों और अन्य कर्मचारियों को परियोजना स्थल पर ले जा रही थी तभी उसमें विस्फोट हुआ था। विस्फोट के बाद बस गहरी खाई में जा गिरी थी।
पाकिस्तान ने शुरुआत में इसे सड़क दुर्घटना करार देकर मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की थी लेकिन चीन के नाराजगी जताने पर जांच शुरू की। बाद में चीन भी इस जांच में शामिल हो गया। गुरुवार को जांच पूरी होने के बाद इस्लामाबाद में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा, आत्मघाती हमले की साजिश अफगानिस्तान में बनी।
हमले के लिए जिस वाहन का इस्तेमाल हुआ वह अफगानिस्तान से आया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय खुफिया एजेंसी रा और अफगानिस्तान की खुफिया एजेंसी एनडीएस ने मिलकर इस हमले को अंजाम दिया। कुरैशी ने कहा, यह पूरी तरह से ब्लाइंड केस था जिसमें कोई सुबूत नहीं छोड़ा गया।
बावजूद इसके पाकिस्तानी एजेंसियों ने साजिश रचने वालों का पता लगा लिया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी एजेंसियों ने 1,400 वर्ग किलोमीटर इलाके में लगे 36 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखकर साजिश का पता लगाया।
प्रेस कान्फ्रेंस में मौजूद पाकिस्तान के आतंकवाद निरोधी विभाग के महानिदेशक जावेद इकबाल ने कहा, आत्मघाती हमले को अंजाम देने वाले शख्स का नाम खालिद अका शेख था और वह अफगानिस्तान का नागरिक था। हमले में कुल 14 लोग शामिल थे और इसका नेतृत्व तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के आतंकी तारिक ने किया। इस हमले की जांच शुरू होते ही पाकिस्तान ने भारत की ओर अंगुली उठानी शुरू कर दी थी।
इससे पहले 23 जून को लाहौर में आतंकी सरगना हाफिज सईद के आवास के नजदीक हुए बम विस्फोट के लिए भी पाकिस्तान ने भारत और रा को जिम्मेदार ठहराया था। कहा था दोनों ही हमलों में भारतीय खुफिया एजेंसी का हाथ है। जबकि भारत ने पाकिस्तान के इन आरोपों को मनगढ़ंत और आधारहीन करार दिया है।

