चंडीगढ़ : तीन कृषि सुधार कानूनों को लेकर पिछले छह महीने से दिल्ली की सीमाओं पर धरने के दौरान जिन किसानों का निधन हो गया है, उनके स्वजन को पंजाब सरकार पांच लाख रुपये की वित्तीय सहायता के अलावा परिवार के सदस्य को नौकरी भी देने पर विचार कर रही है।
इसको लेकर मंथन चल रहा है। एडिशनल चीफ सेक्रेटरी रेवेन्यू रवनीत कौर ने गुरुवार को इस संबंध में उच्च स्तरीय वर्चुअल मीटिंग की थी, जिसमें एडिशनल चीफ सेक्रेटरी डवलपमेंट अनिरुद्ध तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी तेजवीर सिंह, डायरेक्टर एग्रीकल्चर डा. सुखदेव सिंह सिद्धू और गुरप्रीत कौर सपरा मौजूद थीं।
पिछले कुछ दिनों से धरनों पर बैठे किसानों की लगातार हो रही मौतों के बाद से अब विभागीय अधिकारियों को भी यह आंकड़ा निकालने में दिक्कत आ रही है कि किस किसान की केवल हादसे या धरने के दौरान सामान्य मौत हुई और किसकी कोरोना से जान गुई है। बैठक के दौरान इस बिंदु पर सभी सहमत थे, जिसके चलते रवनीत कौर ने डायरेक्टर एग्रीकल्चर सुखदेव सिंह सिद्धू और गुरप्रीत कौर सपरा की अगुआई मे कमेटी का गठन कर दिया।
यह कमेटी एक हफ्ते के अंदर एक ड्राफ्ट पेश करेगी, जिसमें सुझाव दिए जाएंगे कि किसानों का वर्गीकरण कैसे करना है और उनके परिवार में नौकरी देने के लिए चयन कैसे करना है। इस कमेटी की अगले हफ्ते फिर बैठक होगी। सूत्रों का कहना है कि 2017 के चुनाव से पहले कैप्टन सरकार ने किसानों का सारा कर्ज माफ करने का वादा किया था, लेकिन सरकार ने केवल पांच एकड़ तक के किसानों का दो लाख तक का कर्ज ही माफ किया है।
ऐसे में सरकार को उम्मीद थी कि इसका 2022 के चुनाव के दौरान राजनीतिक लाभ मिलेगा, लेकिन जमीनी हालात इस ओर इशारा कर रहे हैं कि किसान वर्ग सरकार से नाराज है। हालांकि, पंजाब सरकार ने तीन कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ स्टैंड लेकर किसानों का साथ दिया है। पंजाब विधानसभा में इन कानूनों के खिलाफ संशोधित कानून भी पारित किए गए हैं। किसानों की नाराजगी को दूर करने के लिए अब सरकार उन्हें नौकरी देने का भी पैंतरा खेलने जा रही है।


