मध्यप्रदेश : हीरे की चाहत में बक्सवाहा जंगल में बसे जीवन पर संकट

महोबा : बुदेलखंड के कई संगठन मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित बक्सवाहा जंगल में हीरा उत्खनन के लिए दो लाख से अधिक पेड़ों को काटने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री, उप्र व मप्र के मुख्यमंत्रियों को खून से खत लिखकर जंगल बचाने की मुहिम छेड़ी है।

इसमें उप्र बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर व फतेहपुर के साथ ही मप्र के जिलों से भी लोग जुड़े हैं। बुंदेली समाज के महामंत्री डा. अजय बरसैया ने बताया कि मप्र के छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी में भी पर्यावरण प्रेमी खून से खत लिख रहे हैं।

वहीं, बक्सवाहा जंगल बचाओ आंदोलन में बुंदेलखंड क्रांति दल, बुंदेलखंड राष्ट्र समिति, बजरंग सेना समेत कई संगठनों ने भी हुंकार भरी है। एक जून को संगठनों के प्रतिनिधियों ने जंगल में भ्रमण किया था।

प्रदेश स्तर पर बात नहीं बनी, तो दिल्ली तक जाकर धरना देंगे। संगठनों के प्रतिनिधियों के मुताबिक, बुंदेलखंड के हजारों साल पुराने बक्सवाहा जंगल को खत्म करने की साजिश रची जा रही है।

मप्र सरकार ने विशाल हीरा भंडार मिलने के बाद एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड को 382 हेक्टेयर जंगल 50 साल की लीज पर दे दिया है। अब वहां लगे 2.15 लाख पेड़ काटे जाएंगे। इसका कई जगह विरोध हो रहा है।

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