कचरे से खाद, रीसाइक्लिंग से कमाई और बायो-माइनिंग से हरियाली: ‘शून्य अपशिष्ट शहर’ बनने की राह पर मदनपल्ले

नई दिल्ली |  आंध्र प्रदेश का मदनपल्ले शहर स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0 के विजन से प्रेरित होकर वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और संसाधनों के सतत पुनर्प्रयोग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। नगरपालिका ने कचरे के स्रोत पर पृथक्करण, वैज्ञानिक प्रसंस्करण, रीसाइक्लिंग, कंपोस्टिंग और पुराने कचरे के निस्तारण को लेकर एकीकृत व्यवस्था विकसित की है। इसका उद्देश्य मदनपल्ले को ‘शून्य अपशिष्ट’ और ‘शून्य कचरा फैलाव’ वाला शहर बनाना है।
नगरपालिका क्षेत्र में प्रतिदिन करीब 62 टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है।

इसमें लगभग 25.50 टन सूखा कचरा, 36 टन गीला कचरा और 0.50 टन घरेलू खतरनाक कचरा शामिल है। इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए घरों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले कचरे को जैव अपघटनीय, गैर-जैव अपघटनीय और पुनर्चक्रण योग्य श्रेणियों में अलग किया जा रहा है।

गीले कचरे से बन रही जैविक खाद
नगरपालिका का विशेष जोर गीले कचरे के विकेंद्रीकृत और वैज्ञानिक प्रबंधन पर है। बड़े कचरा उत्पादकों को अपने परिसरों में कंपोस्टिंग की व्यवस्था करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वहीं नागरिकों को घरेलू कंपोस्टिंग और छतों पर बागवानी के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।

प्रतिदिन करीब 15.50 टन गीले कचरे को नगरपालिका के कंपोस्ट संयंत्र में विंड्रो प्रसंस्करण के जरिए तैयार किया जाता है, जिससे लगभग 4.65 टन कंपोस्ट बनता है। इसका इस्तेमाल शहर के पार्कों, वृक्षारोपण और उद्यानों में किया जाता है।

इसके अलावा करीब 3 टन गीले कचरे से वर्मी कंपोस्टिंग के माध्यम से लगभग 1.20 टन पोषक तत्वों से भरपूर कंपोस्ट तैयार किया जाता है।

सूखे कचरे की रीसाइक्लिंग और पुनर्प्राप्ति : घर-घर से एकत्र किए जाने वाले सूखे कचरे को पुनर्चक्रण योग्य और गैर-पुनर्चक्रण योग्य श्रेणियों में अलग किया जाता है।

पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को मटेरियल रिकवरी सेंटर (MRF) भेजकर प्रसंस्करण किया जाता है और इसके बाद अधिकृत रीसाइक्लिंग इकाइयों तक पहुंचाया जाता है।

वहीं गैर-पुनर्चक्रण योग्य कचरे को सह-प्रसंस्करण के लिए सीमेंट कारखानों में भेजा जाता है। इससे कचरे के उपयोग की दक्षता बढ़ाने के साथ नगरपालिका के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाने में भी मदद मिल रही है।

पुराने कपड़े, ई-कचरे और सामान का दोबारा इस्तेमाल : नगरपालिका घर-घर संग्रहण अभियान और रिड्यूस, रियूज एंड रीसाइकल (RRR) केंद्र के माध्यम से ई-कचरा, पुराने कपड़े, खिलौने, किताबें और जूते जैसी वस्तुएं भी एकत्र कर रही है। उपयोग योग्य वस्तुओं की मरम्मत और पुनः उपयोग के बाद उन्हें जरूरतमंद लोगों, मलिन बस्तियों, बेघर व्यक्तियों और वृद्धाश्रमों तक पहुंचाया जाता है।

शहर ने बेकार पड़े टायरों से ‘वेस्ट-टू-आर्ट’ पहल भी शुरू की है। इनसे तैयार कलाकृतियों के जरिए सार्वजनिक स्थानों और पार्कों को सजाया जा रहा है, जिससे स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है।

36 हजार टन से अधिक पुराने कचरे का निस्तारण : मदनपल्ले में बायो-माइनिंग और बायो-रिमेडिएशन के जरिए करीब 36,512 मीट्रिक टन पुराने कचरे का निस्तारण किया गया है। इससे लगभग 9.40 एकड़ भूमि को मुक्त कराया गया, जिसमें से करीब 5 एकड़ क्षेत्र को वृक्षारोपण के जरिए हरित क्षेत्र में बदला गया है।

कचरे से प्राप्त रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) को सीमेंट संयंत्रों में सह-प्रसंस्करण के लिए भेजा जा रहा है, जबकि मिट्टी और इनर्ट सामग्री का इस्तेमाल निचले क्षेत्रों को भरने में किया जा रहा है।

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