केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने जारी किए राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा-2026 के नए दिशानिर्देश, देशभर में इमरजेंसी मेडिकल ट्रांसपोर्ट होगा एक समान

नई दिल्ली। देशभर में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक तेज, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश (जे.पी.) नड्डा ने सोमवार को राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा (NAS)-2026 के नए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए। पहली बार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एम्बुलेंस सेवाओं के संचालन, निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु एक समान राष्ट्रीय फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा तैयार इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को समय पर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण आपातकालीन चिकित्सा परिवहन उपलब्ध कराना है। नई व्यवस्था के तहत एम्बुलेंस सेवाओं के संचालन से लेकर निगरानी तक के लिए एकीकृत मानक अपनाए जाएंगे।

नई गाइडलाइन के अनुसार सभी एम्बुलेंस AIS-125 मानकों के अनुरूप होंगी। इनमें एम्बुलेंस का वर्गीकरण, जनसंख्या के आधार पर वाहनों की उपलब्धता, आवश्यक उपकरण, दवाएं, मानव संसाधन, आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियनों (EMTs) का प्रशिक्षण, संक्रमण नियंत्रण, वाहन रखरखाव, गुणवत्ता परीक्षण और शिकायत निवारण जैसी व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है।

सरकार ने आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए GPS आधारित एम्बुलेंस ट्रैकिंग, डिजिटल कॉल मैनेजमेंट सिस्टम, इंटेलिजेंट डिस्पैच सिस्टम और इंटीग्रेटेड कमांड एंड डिस्पैच सेंटर (ICDC) स्थापित करने पर भी जोर दिया है। इसके साथ ही एम्बुलेंस सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से राष्ट्रीय आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112 से जोड़ने की योजना बनाई गई है, जिससे प्रतिक्रिया समय कम किया जा सके।

दिशानिर्देशों में GIS (भौगोलिक सूचना प्रणाली) आधारित तकनीक के उपयोग को भी बढ़ावा दिया गया है। इसके माध्यम से अस्पतालों, रेफरल सेंटरों, एम्बुलेंस स्टेशनों, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों, बिस्तरों की उपलब्धता और गंभीर उपचार सुविधाओं की रियल-टाइम मैपिंग की जाएगी। इससे मरीजों को निकटतम और उपयुक्त अस्पताल तक तेजी से पहुंचाने में मदद मिलेगी।

सरकार ने डेटा आधारित एम्बुलेंस तैनाती पर भी विशेष जोर दिया है। आपातकालीन कॉल, सड़क दुर्घटनाओं, ट्रैफिक, भौगोलिक परिस्थितियों और जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर एम्बुलेंस की वैज्ञानिक तैनाती की जाएगी। इससे विशेष रूप से ग्रामीण, दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है।

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