कोरोना के डेल्टा स्ट्रेन के खिलाफ कम प्रभावी है फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन, लैंसेट के अध्ययन में दावा

नई दिल्ली : राजधानी में सीरो सर्वे में 56 फीसद लोगों में कोरोना की एंटीबाडी पाई गई थी, फिर भी दूसरी लहर में बड़ी संख्या में लोगों के संक्रमित होने पर विशेषज्ञ हैरान थे। अब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि दूसरी लहर में दिल्ली में ज्यादातर मरीज कोरोना के नए घातक स्ट्रेन बी.1.617.2 से पीड़ित हुए, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी चिंताजनक वैरिएंट करार दिया है।

एम्स के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि टीका लेने के बाद भी कोरोना से पीड़ित हुए 63.9 फीसद मरीज इस नए स्ट्रेन से ही पीड़ित हुए, लेकिन उन्हें गंभीर बीमारी नहीं हुई और एक भी मरीज की मौत नहीं हुई। यह अध्ययन दो स्तरों पर किया गया। इसके तहत टीकाकरण के बाद संक्रमित 63 मरीजों पर अध्ययन किया गया, जिनकी उम्र 21 से 92 साल है।

इनमें से 36 मरीजों ने दोनों डोज व 27 मरीजों ने टीके की एक डोज ली थी। 10 मरीजों को कोविशील्ड व 53 मरीजों ने कोवैक्सीन की डोज लगी थी। इनमें से 36 मरीजों के सैंपल का जिनोमिक सिक्वेंस जांचा गया, जिसमें 23 मरीज (63.9 फीसद) बी.1.617.2 स्ट्रेन से संक्रमित पाए गए।

चार मरीज (11.1 फीसद) बी.1.617.1 स्ट्रेन व एक मरीज यूके स्ट्रेन से संक्रमित पाया गया। बाद में कोरोना से संक्रमित 200 सामान्य मरीजों के डाटा से उसका मिलान किया गया, जिन्होंने टीका नहीं लिया था। इनमें से 55 फीसद मरीज बी.1.617.2 स्ट्रेन से संक्रमित पाए गए।

एम्स की माइक्रोबायोलाजी विभाग की विशेषज्ञ डा. उर्वशी सिंह ने कहा कि टीकाकरण व बगैर टीकाकरण दोनों ही वर्गों में बी.1.617.2 स्ट्रेन से संक्रमित अधिक मरीज पाए गए। टीका लेने वाले मरीजों में पांच से सात दिन तेज बुखार हुआ, लेकिन उन्हें ज्यादा गंभीर बीमारी नहीं हुई है। इसलिए आइसीयू की जरूरत नहीं पड़ी।

पहली व दूसरी डोज के बाद वायरस के वैरिएंट से संक्रमित मरीज (आंकड़े फीसद में) वैरिएंट पहली डोज के बाद संक्रमण दूसरी डोज के बाद संक्रमण बी.1.617.2 60 76.9 बी.1.617.1 20 7.7 यूके वैरिएंट 6.7 — अन्य 13.3 15.4 सामान्य मरीजों में पाए गए वैरिएंट बी.1.617.2 55 फीसद बी.1.617.1 11.5 फीसद यूके वैरिएंट 17.7 फीसद अन्य 15.8

 

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