नई दिल्ली। देश के गन्ना किसानों की तकनीकी व प्रशासनिक समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी की संयुक्त उच्चस्तरीय बैठक में एक विशेष तकनीकी समिति के गठन का निर्णय लिया गया है। इस समिति में प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों (उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र) के प्रतिनिधि, किसान संगठनों के अधिकृत सदस्य, चीनी मिल एसोसिएशन के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ वैज्ञानिक शामिल होंगे।
यह समिति गन्ने की कटाई के समय, रिकवरी दर के वैज्ञानिक मापदंडों, आधुनिक प्रयोगशाला जांच (लैब टेस्टिंग) और वजन तौलने की शुद्धता से जुड़े हर तकनीकी पहलू का विस्तृत अध्ययन कर समय-सीमा के भीतर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगी।
दो चरणों में तैयार होगा समाधान का खाका : बैठक में तय किया गया कि किसानों और मिलों से जुड़े मुद्दों को दो अलग-अलग स्तरों पर सुलझाया जाएगा:
- अल्पकालिक कदम (Short-term): तौल में गड़बड़ी रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने और लैब व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए तात्कालिक प्रशासनिक सुधार लागू किए जाएंगे।
- दीर्घकालिक रणनीति (Long-term): वैज्ञानिक आधार पर स्थायी नीतिगत नियम बनाए जाएंगे, जिससे भविष्य में रिकवरी दर और मूल्य भुगतान को लेकर विवाद की स्थिति न बने। इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए संबंधित राज्य सरकारों से भी समन्वय का आग्रह किया गया है।
एफआरपी (FRP) निर्धारण में वैज्ञानिक पारदर्शिता: प्रह्लाद जोशी : केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (Fair and Remunerative Price – FRP) के निर्धारण की बारीकियों को साझा किया:
- उन्होंने स्पष्ट किया कि लागत आकलन और मूल्य तय करने की प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक व पारदर्शी है।
- केंद्र सरकार राज्यों और किसान प्रतिनिधियों के समन्वय से आपूर्ति व मूल्य निर्धारण की निगरानी लगातार कर रही है।
किसानों को आर्थिक सशक्तिकरण का पूरा भरोसा: शिवराज सिंह चौहान – बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद करते हुए आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके सुझावों पर अमल करेगी। उन्होंने कहा कि किसानों की आय सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर ठोस और स्थायी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं।

