चार धाम में कोरोना प्रोटोकाल के साथ सभी को दर्शन की अनुमति, हाई कोर्ट ने कहा – जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी

नैनीताल : हाई कोर्ट ने चार धाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या सीमित किए जाने संबंधी प्रतिबंध को हटा लिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक यात्री से कोविड प्रोटोकाल का अनुपालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगा। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि चार धाम में मेडिकल की सुविधाएं और बढ़ाई जाएं। गंभीर मामलों के लिए चापर की व्यवस्था की जाए और इस सुविधा के लिए मोबाइल नंबर भी वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाए।

इस मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर व मुख्य स्थाई अधिवक्ता चंद्रशेखर रावत ने सरकार का पक्ष रखा। कहा कि कोविड को देखते हुए कोर्ट ने श्रद्धालुओं की संख्या सीमित कर दी थी, लेकिन वर्तमान में प्रदेश में कोविड के केस न के बराबर आ रहे हंै।

इसलिए चार धाम यात्रा करने के लिए श्रद्धालुओं की संख्या सीमित किए जाने संबंधी आदेश को संशोधित किया जाए। महाधिवक्ता ने अदालत को यह भी बताया कि यात्रा समाप्त होने में अब 40 दिन से कम समय बचा है। इसलिए जितने भी श्रद्धालु आ रहे हैं, सबको दर्शन करने की अनुमति दी जाए। सरकार यात्रा में कोविड संक्रमण न फैलने देने व अन्य दिशा निर्देशों का अनुपालन भी करा रही है।

चार धाम के लिए ई-पास की बाध्यता खत्म, अब सिर्फ पंजीकरण जरूरी : चारधाम यात्रा को लेकर उच्च न्यायालय से राहत मिलने के बाद शासन ने भी यात्रा के लिए पूर्व में जारी मानक प्रचालन कार्यविधि (एसओपी) में संशोधन कर दिया है। एसओपी के अनुसार, अन्य राज्यों से चार धाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ई-पास की बाध्यता खत्म कर दी गई है।

अलबत्ता, उन्हें देहरादून स्मार्ट सिटी पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य रूप से कराना होगा। इसके अलावा अन्य राज्यों से आने जिन श्रद्धालुओं ने यात्रा से 15 दिन पहले कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगवा ली हैं, उन्हें इसका प्रमाणपत्र दिखाने के बाद धामों में दर्शन की इजाजत दी जाएगी। वहीं, अन्य के लिए 72 घंटे पहले तक की कोरोना जांच की निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य की गई है। 

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