जिलों के केंद्रीय सहकारी बैंकों का राज्य सहकारी बैंकों में होगा विलय, आरबीअाई ने जारी किए निर्देश
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नई दिल्ली । सहकारी बैंकों में सुधार को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने जिला सहकारी बैंकों के राज्य सहकारी बैंकों में विलय के दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि इसके लिए राज्य सरकारों की सहमति जरूरी होगी। रिजर्व बैंक की इस पहल से सहकारी बैंकों में राजनीतिक हस्तक्षेप खत्म किया जा सकेगा और इनमें अनियमितता और गड़बड़ी रोकने में मदद मिलेगी। हालांकि आरबीआइ के दिशानिर्देशों को लेकर सहकारी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। उनका कहना है कि इस तरह के कदम से ग्रामीण सहकारी कर्ज वितरण संस्थान ध्वस्त हो सकते हैं।

राज्य सरकारों की सहमति के बाद भेजे गए प्रस्ताव पर कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से आरबीआइ संबंधित राज्य के सहकारी बैंकों की विस्तृत जांच करेगा। पिछले कुछ वर्षों से घपले और घोटाले के मद्देनजर सरकार ने सहकारी बैंकों के नियमन के लिए कानून में संशोधन किया है। इसमें राज्यों की भूमिका को अहम बनाया गया है। कई राज्यों में सहकारी बैंक में जमा उपभोक्ताओं के धन का जिस तरह से दुरुपयोग किया गया, उससे इन बैंकों पर लोगों का भरोसा डगमगाने लगा था।

आरबीआइ के दिशानिर्देश से पहले ही केरल ने इस दिशा में पहल कर दी है। आरबीआइ ने इसी आधार पर अन्य राज्यों को भी जल्द से जल्द प्रस्ताव भेजने को कहा है। ताकि उनके विलय की प्रक्रिया को समय से पूरा किया जा सके। ऐसा न करने वाले सहकारी बैंकों को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है। उन्हें नाबार्ड से दोबारा मिलने वाले कर्ज की सुविधा से वंचित किया जा सकता है। दिशानिर्देश में ऐसे सभी प्रविधान विस्तार से पेश किए गए हैं।

हालांकि नेशनल को-ऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (एनसीयूआइ) के प्रेसिडेंट ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में किसानों को वितरण का यह प्रमुख साधन है। आरबीआइ की पहल से इस पर बुरा असर होगा। नेशनल फेडरेशन ऑफ स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के एमडी का कहना है कि रिजर्व बैंक की इस पहल से देश में सहकारी कर्ज वितरण का तीन स्तरीय ढांचा बिगड़ जाएगा।

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