टीकाकरण नीति पर राहुल ने उठाया सवाल, कहा- यदि फ्री वैक्सीन है तो निजी अस्पतालों को शुल्क क्यों वसूलना चाहिए

नई दिल्ली : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की टीकाकरण नीति पर सवाल उठाया है। उन्होंने सोमवार को ट्वीट किया, एक साधारण सा सवाल है। यदि हर किसी के लिए टीकाकरण मुफ्त है, तो निजी अस्पतालों को इसके लिए शुल्क क्यों वसूलना चाहिए? इस ट्वीट के साथ उन्होंने फ्री वैक्सीन फार आल का हैशटैग भी लगाया है।

हालांकि, देश में सभी लोगों को कोरोना की फ्री वैक्सीन देने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एलान का पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर ने स्वागत किया है।

उन्होंने कहा कि मैंने दो बार प्रधानमंत्री को निजी तौर पर ऐसा करने के लिए लिखा था और यही एकमात्र हल है। इससे वैक्सीन खरीद के दाम में भी एकरूपता आएगी। कहा, ‘मैं प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत करता हूं कि उन्होंने हमारी बात मान ली।’ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे देर से लिया गया फैसला करार दिया।

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि केंद्र किस तरह टीके की निर्बाध आपूर्ति बहाल रख पाएगा। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट कर कहा कि काफी दबाव के बाद केंद्र ने यह मांग मानी है। ममता ने साथ ही आरोप लगाया कि पीएम ने फ्री वैक्सीन पर काफी देरी से फैसला लिया है।

वह पिछले चार महीने से देश में सभी लोगों को फ्री वैक्सीन की मांग कर रही थीं। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मुफ्त टीके की घोषणा के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया है। उन्होंने ट्वीट किया, हर एक जिंदगी महत्वपूर्ण है।

जब तक हर किसी का टीकाकरण नहीं हो जाता तब तक कोई सुरक्षित नहीं है। वाम दलों ने आरोप लगाया कि मुफ्त टीकाकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के डर और विपक्ष के दबाव में आकर सरकार ने भेदभाव वाली नीति को छोड़ दिया।

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने ट्वीट किया, केंद्र की खराब नीति के चलते हजारों लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। भाकपा के महासचिव डी राजा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अपना रुख बदलने के लिए मजबूर कर दिया। 

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