नई दिल्ली : अफगानिस्तान में तेजी से बदलते हालात के बीच वहां शांति स्थापित करने के उद्देश्य से कतर की राजधानी दोहा में बुलाई गई बैठक में शामिल दर्जनभर देशों ने तालिबान को चेतावनी दी है कि अगर उसने काबुल पर हिंसा के जरिये कब्जा किया तो उसे कोई भी मान्यता नहीं देगा। तीन दिनों की बैठक के बाद गुरुवार आधी रात को एक संयुक्त बयान जारी किया गया जिसमें उक्त बात है।
लेकिन शुक्रवार को तालिबान ने जिस तरह से काबुल को चारों तरफ से घेरकर आस-पास के शहरों में पुलिस थानों, विश्वविद्यालयों, रेडियो स्टेशन, बैंकों और सैन्य अड्डों पर आसानी से कब्जा कर लिया उससे साफ है कि शांति वार्ता में शामिल देशों के संयुक्त बयान का अब कोई मतलब नहीं रह गया है। एक दिन पहले तक अनुमान था कि तालिबान एक महीने में काबुल पर कब्जा कर लेगा, लेकिन अब माना जा रहा है कि ऐसा कुछ ही दिनों में हो जाएगा।
भारत के कूटनीतिक सूत्रों ने ‘दैनिक जागरण’ को बताया कि ज्यादातर देश अब काबुल में अशरफ गनी सरकार के पतन का इंतजार कर रहे हैं, साथ ही वे अपने अपने दूतावासों को सुरक्षित करने में भी जुटे हुए हैं।
गुरुवार को दोहा में हुई बैठक में अमेरिका, रूस, चीन, जर्मनी, नार्वे, पाकिस्तान, ईरान, तुर्की, इंडोनेशिया, तुर्कमेनिस्तान और ताजिकिस्तान के अलावा भारत का प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुआ। संयुक्त बयान में नौ बिंदु हैं और उनका निचोड़ यही है कि तालिबान को आक्रमण और हिंसा की राह छोड़कर युद्धविराम और शांति की राह पर आगे बढ़ना चाहिए।
इसमें तालिबान से अफगानिस्तान के सभी प्रांतों और उनकी राजधानियों पर हमले रोकने की अपील की गई है। तालिबान और अशरफ गनी सरकार से कहा गया है वे हिंसा की राह छोड़कर अफगानिस्तान की समस्या का राजनीतिक हल निकालने के लिए आगे बढ़ें।


