नकली रेमडेसिविर बनाकर कई राज्यों में करते थे सप्लाई, दो करोड़ रुपए बरामद, 6 अरेस्ट

रूपनगर : पंजाब पुलिस ने कोरोना काल में जाली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचकर करोड़ों रुपये की काली कमाई करने वाले गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। उत्तर प्रदेश के मुज्जफरनगर के गांव खुड्डा का रहने वाला मुहम्मद शाहवर इस गिरोह को चला रहा था।

आरोपितों से दो करोड़ रुपये नकद, चार कारें (यूपी-12-बीबी-6710, यूके-08-एसी-256, पीबी-65-एयू-5784 और सीएच -01-एक्स-7862) सहित दो लैपटाप बरामद किए गए हैं। रूपनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डा. अखिल चौधरी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मुहम्मद शाहवर के अलावा उतर प्रदेश के बागपत के अरशद खान, सहारनपुर (उतर प्रदेश) के मुहम्मद अरशद, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) के प्रदीप सरोहा और बहलोलपुर (मोहाली) के शाह नजर व शाह आलम के रूप में हुई है।

पूछताछ में सामने आया है कि इन लोगों ने कोरोना काल में एंटीबायटिक दवा की वायल (शीशियों) पर रेमडेसिविर के जाली लेबल बनवाकर लगाए और बाजार में बेचकर मोटी कमाई की। शाहवर ने करोड़ों कमाए: फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में पांच साल का तजुर्बा रखने वाले मुहम्मद शाहवर ने नकली लेबल और डिब्बे तैयार करवाए। अपने साथियों के साथ उसने एंटीबायटिक दवा की शीशियों पर रेमडेसिविर के लेबल लगाकर मोटी कमाई की।

पंजाब व हरियाणा सहित कई अन्य स्थानों पर करीब 12 हजार इंजेक्शन बेचकर पांच करोड़ रुपये कमाए थे। नहर में बहा दीं वायल: एसएसपी डा. अखिल चौधरी के अनुसार, आरोपितों ने बताया कि 27 अप्रैल को हरियाणा के पानीपत में रेमडेसिविर इंजेक्शन ब्लैक करने वाले तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद सामने आया कि उन्होंने यह इंजेक्शन पानीपत के प्रदीप नाम के व्यक्ति से खरीदे थे। यह वही प्रदीप था जिसे मुहम्मद शाहवर के गिरोह ने नकली इंजेक्शन सप्लाई किए थे।

इसके बाद शाहवर ने छह मई, 2021 को रूपनगर आकर नहर में जाली रेमडेसिविर की वायल बहा दीं। पुलिस ऐसे पहुंची आरोपितों तक: एसएसपी ने बताया कि नहर से बरामद वायल पर मलोआ (चंडीगढ़) में नोटविनस फार्मास्यूटिकल फर्म का पता दर्ज था। पता चला कि कंपनी का मालिक मुहम्मद शाहवर है। उसे पकड़ा गया तो कड़ियां जुड़ती चलीं गईं। यह था मामला छह मई को भाखड़ा नहर में तीन हजार रेमडेसिविर और सेफोपेराजोन के लेबल वाली वायल बहाई गईं थी।

जिन्हें विभिन्न गांवों के लोगों की सूचना पर पुलिस और सेहत विभाग की टीम ने नहर से निकाला। थाना चमकौर साहिब में केस दर्ज करके मामले की जांच शुरू की गई। एसआइटी ने पांच हफ्ते में इस मामले से पर्दा उठा दिया। नहर से बरामद दवाओं के सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए कोलकाता भेजे गए हैं। 

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