पंजाब में एक और बड़े बदलाव की तैयारी, हरीश रावत की जगह हरीश चौधरी बन सकते हैं कांग्रेस प्रभारी

चंडीगढ ़: पंजाब कांग्रेस में खींचतान से तंग पार्टी के प्रदेश प्रभारी हरीश रावत अब अपने राज्य उत्तराखंड में छह महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव पर ध्यान देना चाहते हैं।

रावत की जगह केंद्रीय पर्यवेक्षक हरीश चौधरी को पार्टी का पंजाब प्रभारी बनाया जा सकता है। राज्य में कांग्रेस के घटनाक्रम को लेकर हरीश चौधरी कुछ दिनों से सक्रिय हैं। वह पार्टी विधायक दल की बैठक के लिए अजय माकन के साथ पर्यवेक्षक के रूप में चंडीगढ़ आए थे।

इसके बाद पंजाब में मुख्यमंत्री को बदला गया था। इसके बाद से वह पंजाब में लगातार सक्रिय हैं। हरीश चौधरी पहले भी पंजाब के सह-प्रभारी रह चुके हैं, लेकिन राजस्थान में चुनाव लड़ने के लिए उन्हें इस पद से मुक्त कर दिया था। पंजाब कांग्रेस में खींचतान और घटनाक्रम को लेकर हरीश रावत भी सवालों के घेरे में आ रहे हैं।

रावत ने पहले कहा था कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में ही अगला विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा। इस पर सिद्धू के करीबी परगट सिंह ने उन पर निशाना साधा। इसके बाद रावत को सफाई देनी पड़ी थी और अपना बयान वापस लेना पड़ा था। शुक्रवार को रावत ने अमरिंदर सिंह की कमियां गिनाईं तो कैप्टन ने कड़ा प्रतिकार किया।

एक समय पंजाब में पार्टी अध्यक्ष रहे सुनील जाखड़ से भी उनका विवाद हो गया था। सियासी जानकारों का कहना है कि पंजाब कांग्रेस में जिस तरह से खींचतान चली और घटनाक्रम हुए हरीश रावत उसे प्रभावी तरीके से नहीं संभाल पाए।

उत्तराखंड पर ध्यान नहीं दे पा रहे रावत हरीश रावत उत्तराखंड में प्रचार कमेटी के प्रभारी बनाए गए हैं, लेकिन पंजाब में कांग्रेस की उठापटक के कारण वह उत्तराखंड में ध्यान नहीं दे पा रहे हैं, जहां वह मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं। हरीश रावत ने भी पंजाब कांग्रेस के प्रभारी के दायित्व से खुद को मुक्त करने की कांग्रेस हाईकमान से गुजारिश की थी।

पंजाब के साथ उत्तराखंड में भी 2022 में विधानसभा चुनाव होना है और ऐसे में रावत पंजाब में पूरा समय नहीं दे पाएंगे। माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान इन बिंदुओं को ध्यान में रखकर रावत को पंजाब कांग्रेस के प्रभारी पद से मुक्त कर सकता है। पंजाब में लगातार सक्रिय हैं चौधरी हरीश राय चौधरी पंजाब में सीएम में बदलाव के बाद राज्य कांग्रेस के मामले में लगातार सक्रिय हैं।

नवजोत सिंह सिद्धू के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद भी वह सक्रिय रहे। सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी की बैठक के दिन भी कांग्रेस नेतृत्व ने हरीश चौधरी को चंडीगढ़ भेजा। उन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू से अलग से भी बातचीत की। इससे भी संकेत मिल रहे हैं कि पंजाब कांग्रेस को लेकर उनको बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।

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