चंडीगढ़ : पंजाब में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और ओम प्रकाश सोनी पहले ही शपथ ले चुके थे। रविवार को राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने और 15 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई।
नई कैबिनेट में 11 पुराने व सात नए चेहरे हैं। अभी मंत्रियों के विभागों का बंटवारा नहीं हो पाया है। इस बीच, मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है।
सबसे ज्यादा विरोध कैप्टन अमरिंदर की सरकार में रेत खनन का ठेका अपने रसोइये को दिलवाने के मामले में मंत्री पद गंवा चुके राणा गुरजीत सिंह को दोबारा कैबिनेट में जगह देने पर हुआ। दोआबा के कांग्रेस विधायकों को हाईकमान का यह फैसला पसंद नहीं आया। दोआबा के छह विधायकों और एक पूर्व सांसद ने प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को पत्र भी लिखा, लेकिन कोई असर नहीं पड़ा और राणा ने शपथ ले ली।
आप छोड़कर वापस कांग्रेस में आए विधायक सुखपाल खैहरा, सुल्तानपुर लोधी के विधायक नवतेज चीमा, जालंधर (उत्तरी) के विधायक बावा हैनरी, फगवाड़ा के विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल, शाम चौरासी के विधायक पवन आदिया, चब्बेवाल के विधायक डा. राजकुमार चब्बेवाल व पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह केपी शामिल ने पत्र लिखकर राणा गुरजीत को मंत्री बनाए जाने पर आपत्ति जताई। फिरोजपुर के विधायक परविंदर पिंकी ने भी राणा की कैबिनेट में एंट्री पर सवाल खड़े किए।
आरोप लगाया कि राणा गुरजीत सिंह को भ्रष्टाचार के मामले में कैबिनेट से हटाया गया था। उन्हें न तो सरकार ने कभी क्लीन चिट दी और न ही किसी अदालत ने।
अन्य नेताओं के साथ सिद्धू के पटियाला स्थित घर पहुंचे खैहरा ने कहा कि राणा गुरजीत पर गंभीर आरोप हैं और उनके खिलाफ ईडी की जांच भी चल रही है।


