श्रीनगर : नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डा. फारूक अब्दुल्ला जिस सच्चाई को झुठलाते हुए आए हैं, उसे उन्होंने रविवार को मां बेगम अकबर जहां की 21वीं पुण्यतिथि पर सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया।
वह सच्चाई जम्मू और कश्मीर संभाग के एक दूसरे से भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक आधार पर सर्वथा भिन्न होने की है।
नेकां हमेशा यही कहती आई है कि दोनों संभाग एक समान हैं। अलबत्ता, डा. फारूक ने कहा कि जम्मू और कश्मीर दोनों ही एक दूसरे से अलग हैं और उनके मुद्दे भी अलग हैं।
गौरतलब है कि बीते दिनों प्रदेश के दौरे पर आए परिसीमन आयोग के समक्ष जम्मू में नेशनल कांफ्रेंस की स्थानीय इकाई ने जम्मू संभाग के साथ राजनीतिक भेदभाव का मुददा उठाते हुए परिसीमन की प्रक्रिया में इसे दूर करने का आग्रह किया था।
नेकां ने जम्मू में स्थानीय परिवेश के मुताबिक निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया है। नेकां ने जम्मू में परिसीमन के मुद्दे पर कमोबेश भाजपा की लाइन ही पकड़ी है।
इससे कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के विरोधी मुखर हो गए हैं और वह कह रहे हैं कि नेकां की बोली हर जगह अलग है।
कश्मीर में वह एक बात करती है, जम्मू में दूसरी और दिल्ली में तीसरी। रविवार को हजरतबल के पास नसीमबाग मे अपनी मां के मकबरे पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद डा. फारूक ने पत्रकारों से कहा कि यह कोई बड़ा मसला नहीं है।
जम्मू और कश्मीर में अगर नेकां के नेताओं ने अलग अलग मुद्दे उठाएं तो उनसे लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। जम्मू का एक अलग मुद्दा है और कश्मीर के अपने मुद्दे हैं। दोनों की अपनी समस्याएं हैं।
इसलिए लोगों को इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है। अफगानिस्तान में अमन बहाल हो : अफगानिस्तान के हालात पर उन्होंने कहा कि मेरा उससे कोई वास्ता नहीं है।
इसलिए वहां होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर या उससे कश्मीर में होने वाले असर पर मैं कुछ नहीं कह सकता। लेकिन मैं खुदा से दुआ करता हूं कि अफगानिस्तान में अमन बहाल हो।


