रांची : झारखंड हाई कोर्ट में ब्लैक फंगस मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई।अदालत ने मरीज उषा देवी की मौत पर कड़ी नाराजगी जताते हुए राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) निदेशक को फटकार लगाई और कहा कि पीड़िता का देरी से इलाज शुरू किया गया। इसके चलते उसकी मौत हो गई।
इस मामले में चिकित्सकों ने अनदेखी की है। अदालत ने कहा कि जब महिला एक महीने से रिम्स में भर्ती थी तो उसका आपरेशन पहले क्यों नहीं किया।
अदालत ने टिप्पणी की, कोरोना काल में निजी अस्पताल सेवा के बजाय पैसा कमाने की मशीन बन गए हैं। उनमें अब संवेदना ही नहीं रही है। कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज में नए चिकित्सकों को नैतिकता का पाठ पढ़ाए जाने की जरूरत है।
अदालत ने पीड़िता के मौत मामले में रिम्स निदेशक से जांच रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने कहा कि रिम्स निदेशक अपनी टीम के साथ इस मामले की जांच करें और रिपोर्ट दाखिल करें कि आखिर किस वजह से महिला की मौत हुई है।
साथ ही राज्य सरकार को सभी जिला अस्पतालों में ब्लैक फंगस से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
रिम्स निदेशक को तत्काल अदालत में उपस्थित होने का दिया निर्देश : इस दौरान रिम्स की ओर से किसी अधिवक्ता के उपस्थित नहीं होने पर अदालत ने तुरंत रिम्स निदेशक को वीसी के जरिए जुड़ने का आदेश दिया। कुछ देर बाद रिम्स निदेशक वीसी से जुड़कर अदालत में हाजिर हुए। अदालत ने उनसे पूछा कि ब्लैक फंगस की पीड़ित महिला का क्या हुआ।
रिम्स निदेशक ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद तीन सर्जनों की निगरानी में सर्जरी हुई। महिला की तबीयत खराब होने पर उसे आइसीयू में भर्ती कराया गया।
लेकिन ब्लड प्रेशर और शुगर नियंत्रित नहीं होने की वजह से उनकी मौत हो गई। अदालत ने कहा कि उसकी सर्जरी में एक माह क्यों लगा। इसी वजह से बीमारी गंभीर हुई। यहां मरीज की अनदेखी हुई।
स्वतंत्र एजेंसी से कराना चाहते हैं जांच : अदालत ने कहा हम इस मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराना चाहते हैं। रिम्स एक सरकारी संस्था है, उसमें इतनी बड़ी लापरवाही कैसे की जा सकती है।
मरीजों के परिजनों को इस बात की जानकारी लेने का पूरा हक है कि चिकित्सक मरीज का कैसे इलाज कर रहे हैं।
चिकित्सकों को यह समझना चाहिए कि वर्तमान में कोरोना उनका दुश्मन है न कि कोई मरीज। उन्हें मरीजों के स्वजन से अच्छा बर्ताव करना चाहिए। रिम्स निदेशक ने कोर्ट की बातों से सहमति जताई और कहा कि इसकी जांच की जाएगी।
बता दें कि ब्लैक फंगस मरीज उषा देवी के बेटे ने रिम्स में समुचित इलाज नहीं होने पर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा था। इस पत्र पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका में तब्दील किया था।


