नई दिल्ली : सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने गुरुवार को कहा कि जब तक भारत और चीन के बीच सीमा समझौता नहीं हो जाता, तब तक दोनों देशों के बीच सीमा पर घटनाएं होती रहेंगी। पीएचडी चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के एक कार्यक्रम में जनरल नरवणे ने कहा, ‘हमारे बीच सीमा का मुद्दा लंबित है।
किसी भी तरह का दुस्साहस हो सकता है और हम उससे निपटने के लिए फिर तैयार हैं जैसा हम अतीत में दिखा चुके हैं। ऐसी घटनाएं तब तक होती रहेंगी जब तक कोई दीर्घकालिक समाधान नहीं हो जाता और वह है सीमा समझौता।
हमारी सभी कोशिशें इसी दिशा में होनी चाहिए ताकि उत्तरी (चीन से लगती) सीमा पर स्थायी शांति हो सके।’ अफगानिस्तान के बारे में सेना प्रमुख ने कहा कि हालिया घटनाक्रमों पर निश्चित रूप से सेना का ध्यान है। वह लगातार खतरे का आकलन कर रही है और उसके मुताबिक रणनीतियां बना रही है। जहां तक आतंकी खतरे का संबंध है तो भारतीय सेना सभी चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर में हमारा बेहद गतिशील आतंकरोधी ग्रिड है जो खतरे के आकलन और हमारे पश्चिमी पड़ोसी की आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिशों के बढ़ते स्तर पर आधारित है।’ जनरल नरवणे ने कहा कि इसमें उतार-चढ़ाव के आधार पर हम अपने अभियानों के स्तर में भी बदलाव करते हैं। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर घटनाक्रमों ने हमारे पश्चिमी एवं पूर्वी मोर्चे पर हमारी सक्रिय एवं विवादित सीमाओं पर जारी चुनौतियों को बढ़ा दिया है।
आधुनिक तकनीक हासिल करने में नौकरशाही अवरोध
रक्षा तकनीक के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के बारे में बोलते हुए जनरल नरवणे ने कहा कि अप्रचलित हो चुकी तकनीक से बचना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हमारी लंबी खरीद प्रक्रिया और नौकरशाही के अवरोध हमें अत्याधुनिक तकनीक हासिल करने से रोकते हैं और यह वास्तविक खतरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कारोबारी सुगमता के लक्ष्य के साथ व्यवस्थागत बदलाव लाने के लिए काफी काम किया गया है और यह निरंतर जारी है। अभी भी पुराने नियम और प्रक्रियाएं हैं जो तर्क को नकारती हैं और आधुनिक सर्वश्रेष्ठ चलन के खिलाफ हैं। इनका समाधान करने की जरूरत है। उद्योग जगत को भी सुधारों पर जोर देने की जरूरत है।


