नई दिल्ली/नागपुर। भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति को वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ स्थापित करने के उद्देश्य से आयुष मंत्रालय द्वारा 11वें आयुर्वेद दिवस का मुख्य राष्ट्रीय समारोह नागपुर में आयोजित किया जा रहा है। “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” (Ayurveda for a Healthy Future) की मुख्य थीम पर आधारित इस वैश्विक आयोजन में भारत सहित दुनिया भर के आयुर्वेद संस्थान, शोधकर्ता, वैद्य और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे। यह दिवस आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ आयुर्वेद के एकीकरण, नवाचार, साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और सामुदायिक कल्याण पर केंद्रित रहेगा।
नागपुर समारोह में होंगी ये ऐतिहासिक शुरुआतें:
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आयुष सेवा क्षेत्र पर पहली आधिकारिक रिपोर्ट: विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (RIS) द्वारा तैयार आयुष सेवा क्षेत्र की पहली व्यापक मूल्यांकन रिपोर्ट का विमोचन किया जाएगा, जो स्वास्थ्य सेवाओं में आयुष के योगदान का लेखा-जोखा पेश करेगी।
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औषधीय पौधों पर सुरक्षा डोजियर: पारंपरिक औषधियों की प्रमाणिकता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘गोक्षुर’ (Tribulus terrestris) और ‘चंद्रसूर’ (Lepidium sativum) पर विशेष सुरक्षा डोजियर और त्वचा विकारों (Skin Disorders) के लिए मानक उपचार दिशानिर्देश (Standard Treatment Guidelines) जारी किए जाएंगे।
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CCRAS-अग्नि वेब पोर्टल: केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की अनूठी पहल ‘आयुर्वेद ज्ञान नैपुण्य पहल’ (AGNI Assessment Scale) वेब पोर्टल का शुभारंभ होगा, जिससे जमीनी स्तर पर चिकित्सकों द्वारा किए जा रहे नैदानिक नवाचारों को दर्ज किया जा सकेगा।
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आयुष विज़न 2030: समारोह के दौरान “पारंपरिक ज्ञान से वैश्विक नेतृत्व तक: आयुष विजन 2030” और भारत में आयुष-संबंधित पेटेंट व आविष्कारों की स्थिति रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाएगी।
गैर-संचारी रोगों (NCDs) पर नियंत्रण के लिए दो वैज्ञानिक सत्र : सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के बीच दो उच्च-स्तरीय तकनीकी व वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए जाएंगे:
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सत्र-I (“शाश्वतम से विश्वास तक”): स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद की भूमिका और ‘विकसित भारत @2047’ के रोडमैप पर केंद्रित परिचर्चा।
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सत्र-II (उपचारों का एकीकरण): वर्ष 2027 तक जीवनशैली जनित गैर-संचारी रोगों जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन और हृदय रोगों के बोझ को घटाने के लिए आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के समन्वय पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह 11वां संस्करण पारंपरिक ज्ञान को केवल आस्था तक सीमित न रखकर उसे आधुनिक वैज्ञानिक कसौटियों, क्लीनिकल ट्रायल्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए पूरी दुनिया में जन-स्वास्थ्य का प्रमुख आधार बनाने की दिशा में निर्णायक कदम सिद्ध होगा।

