इंदरगढ़ । कोई गरीब या मजदूर भूखा न रहे इसके लिए प्रदेश सरकार बार-बार अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करती रही है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक दिशा निर्देश भी जारी किए गए हैं। बाबजूद इसके संबंधितों की लापरवाही के चलते ग्रामीण क्षेत्र के कई गरीब परिवार खाद्यान्न से वंचित है। ऐसे में इन गरीब परिवारों को दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़ रहे हैं।
सहकारी समिति ग्राम भर्रोली की छैंकुरी उचित मूल्य दुकान के अंतर्गत आने वाले गांव सेंवनी, जिगिनियां, बंडापारा तथा छैंकुरी का राशन वितरण किया जाता है। इस सोसाइटी से चार गांवों के कुल 348 परिवार सम्बद्ध हैं। जिनमें सेवनी, छैंकुरी और बंडापारा गांव के हितग्राहियों को तो खाद्यान्न का वितरण कर दिया गया लेकिन जिगिनियां के लगभग 160 परिवारों को खाद्यान्न वितरित ही नहीं किया गया।
दो माह में मिली सिर्फ दो किलो ज्वार-
छैंकुरी उचित मूल्य दुकान से गरीबों को सिर्फ दो माह में केवल दो किलो ज्वार का ही वितरण किया गया है। दो माह में प्रति व्यक्ति के हिसाब से महज दो किलो ज्वार बांटी गई जिसमें दो जून की रोटी भी पूरे माह मिल पाना संभव नहीं है। इस बारे में जहां खाद्य विभाग ने मामले की जांच करवाने की बात की है। वहीं इन विभागीय प्रक्रियाओं के चलते गरीब अपने हक के राशन के लिए परेशान हैं। 168 गरीब परिवारों के सामने उदरपूर्ति का संकट खड़ा हो गया है।
राशन के लिए भटक रहे जिगिनिया के ग्रामीणों में शामिल शांति कुशवाह पत्नि भगवान सिंह, सुल्तान बरेठा का कहना है कि घर में 6 सदस्य हैं और मजदूरी करने के बाद बड़ी मुश्किल से पेट पालते हैं। ऐसे में कूपन पर मिलने वाले अनाज से कुछ काम चल जाता है। लेकिन दो महीने से राशन नहीं मिला, जिससे परिवार का पेट भरना मुश्किल हो रहा है। दो-दो किलो ज्वार से हमारा गुजारा कैसे होगा।
वहीं सैल्समेन कमलेश रावत ने बताया कि उचित मूल्य दुकान पर खाद्यान्न वितरण के लिए जितना आबंटित किया गया था, वितरित कर दिया है। स्टाक कम होने के कारण ग्राम जिगिनियां का पिछले माह का खाद्यान्न वितरित नहीं हुआ। अभी इस माह हमें 30 क्विंटल 5 किलो ज्वार ही मिली है, जो वितरित कर दी है। गेहूं, चावल, शक्कर आदि उपलब्ध न होने के इनका कारण वितरण नहीं हुआ है।
इनका कहना है-
ऐसा होना तो नहीं चाहिए कि किसी गांव में दो माह से खाद्यान्न का वितरण न किया गया हो। लेकिन यदि ऐसा है तो मैं तत्काल मामले को दिखवाता हूं और आवश्यक कार्रवाई जरुर की जाएगी। – अनुराग निंगवाल,एसडीएम सेवढ़ा।
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समितियों को पूर्व में बिना फिंगर प्रिंट लिए उपभोक्ता को वितरित किए गए खाद्यान्न का वितरण रजिस्टर का मिलान कर सत्यापन करवाना आवश्यक है। जब तक इस रजिस्टर का सत्यापन नहीं कराया जाता तब तक विक्रेता को ही खाद्यान्न वितरण करने की जिम्मेदारी लेनी होगी। इस पूरे मामले को दिखवाते हैं। – डीएस धाकरे, प्रभारी जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी दतिया।

