नई दिल्ली। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बीस हजार करोड़ रुपये की प्रारंभिक पूंजी के साथ विकास वित्त संस्थान की स्थापना के लिए विधेयक को मंजूरी दे दी है। यह विधेयक संसद के मौजूदा बजट सत्र में पेश किया जाएगा। इस संस्थान से देश में बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के लिए दीर्घावधि कोष बनाया जा सकता है।
आज मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने नई दिल्ली में संवाददाताओं को बताया कि इसके लिए शुरूआती अनुदान पांच हजार करोड़ रुपये का होगा और इतनी ही राशि तक का अतिरिक्त अनुदान होगा।
उन्होंने बताया कि सरकार इस संस्थान को कुछ प्रतिभूतियां जारी करने पर भी विचार कर रही है जिससे कोष की लागत कम हो सकेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार को बाजार से बडी राशि प्राप्त होने की आशा है।
उन्होंने बताया कि संस्थान अगले कुछ वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपये तक जुटा सकता है। संस्थान को दस साल की लम्बी अवधि के लिए कुछ कर लाभ दिए जाएंगे।
भारतीय स्टैम्प अधिनियम को भी संशोधित किया जा रहा है। संस्थान की संरचना के बारे में वित्तमंत्री ने बताया कि इसके लिए एक पेशेवर बोर्ड होगा जिसमें कम से कम पचास प्रतिशत गैर अधिकारी निदेशक होंगे।
बोर्ड में प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार इस संस्थान को पूरी तरह पेशेवर बनाना चाहती है ताकि यह बाजार की अपेक्षाओं पर खरा उतर सके।


