नई दिल्ली | केंद्र सरकार के अनुसार, वर्ष 2021 से जुलाई 2026 तक विदेशों में मौजूद 274 भगोड़े अपराधियों को 36 अलग-अलग देशों से भारत वापस लाया गया है। सरकार का कहना है कि भगोड़े अपराधियों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता देते हुए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्य पुलिस के बीच समन्वय को मजबूत किया गया है।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी में बताया गया कि भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए वैश्विक स्तर पर अभियान, एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और कूटनीतिक प्रयासों पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार के मुताबिक, यह कार्रवाई केवल आर्थिक अपराधों तक सीमित नहीं है, बल्कि आतंकवाद, संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, हत्या, यौन अपराध, मानव तस्करी और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में भी की गई है।
274 भगोड़ों की हुई भारत वापसी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 से जुलाई 2026 के बीच कुल 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया। इनमें 62 आरोपी हत्या, डकैती और अन्य हिंसक अपराधों से जुड़े थे, जबकि 53 आरोपी यौन अपराध, दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों में वांछित थे। इसके अलावा संगठित अपराध और गैंगस्टर से जुड़े 42, मानव तस्करी व अपहरण से जुड़े 18 तथा आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े 17 आरोपियों को भी वापस लाया गया।
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में सबसे अधिक 70 भगोड़ों की भारत वापसी हुई, जबकि 2026 में जुलाई तक 45 आरोपियों को वापस लाया जा चुका है।
पिछले तीन साल में 401 रेड कॉर्नर नोटिस : सरकार के अनुसार, भगोड़े अपराधियों को विदेशों में ट्रैक करने और उनकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में इंटरपोल के माध्यम से भी कार्रवाई तेज हुई है। पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए। वर्ष 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112 और 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने की जानकारी दी गई है।
‘भारतपोल’ से एजेंसियों के बीच बढ़ा समन्वय : सरकार ने जनवरी 2025 में ‘भारतपोल’ प्लेटफॉर्म शुरू किया। इसके माध्यम से केंद्रीय जांच एजेंसियों, राज्य पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन इकाइयों को इंटरपोल से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक साझा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। सरकार के अनुसार, देशभर की 1,400 से अधिक एजेंसी यूनिट इस नेटवर्क से जुड़ी हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय मामलों में सूचना साझा करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में तेज हुई है।
भगोड़ों की संपत्तियों पर भी कार्रवाई
सरकारी जानकारी के मुताबिक, मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून यानी PMLA के तहत कार्रवाई करते हुए वर्ष 2019 से 2026 के बीच भगोड़े अपराधियों से संबंधित 17,874 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई। इसी अवधि में 18,762 करोड़ रुपए की संपत्ति की सफल वापसी (Restitution) किए जाने का भी दावा किया गया है।
कानूनों में भी किए गए बदलाव : सरकार ने बताया कि भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को मजबूत करने के लिए कई विधायी बदलाव किए गए हैं। 2024 में लागू नए आपराधिक कानूनों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 355 और 356 के तहत अनुपस्थिति में मुकदमे यानी Trial in Absentia का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा 2019 में NIA और UAPA कानूनों में संशोधन का भी उल्लेख किया गया है।
ऑपरेशन त्रिशूल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रैकिंग : सरकार के अनुसार, विदेशों में अपनी पहचान या नाम बदलकर छिपे आरोपियों का पता लगाने के लिए तकनीकी और खुफिया संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ के तहत इंटरपोल के सहयोग से डिजिटल फुटप्रिंट, सर्विलांस और अन्य तकनीकी माध्यमों से संदिग्धों की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की गई।
सरकार का कहना है कि भगोड़े अपराधियों को वापस लाने की प्रक्रिया में CBI, NIA, ED, NCB, IB, R&AW, MEA, DGGI और राज्य पुलिस सहित कई एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।

