मनरेगा में मजदूरों को नहीं मिल पा रही है मजदूरी, 50 हजार में से सिर्फ 12 हजार के पास काम

दतिया। जिले में मनरेगा जॉब कार्ड की हकीकत धरातल पर कुछ अलग ही है। जिले में लगभग 50 हजार लोग जॉब कार्ड के लिए दर्ज हैं, मगर उनके पास काम नहीं है। जिला प्रशासन सिर्फ 12 हजार लोगों को ही काम दे पा रहा है। एक तरफ जहां जिला पंचायत का कहना है कि 182 रूपये प्रतिदिन ग्रामी्णों को मजदूरी नहीं जमती है वे इस कारण काम करने नहीं आते हैं। वही पंचायतों में निर्माण कार्य भी नहीं होने से लोगों को मजदूरी नहीं मिल पा रही है। पंचायतों में अभी भी कई कार्य बजट के अभाव में लंबित है।

जिले में लगभग 50 हजार जॉब कार्ड रजिस्टर्ड है। इनके एवज में मात्र 12 हजार लोगों को ही मजदूरी मिल पा रही है। बता दें कि मनरेगा योजना के तहत जॉब कार्ड होल्डर को 100 कार्य दिवस कार्य देना आवश्यक है। इस काम के लिए प्रतिदिन उसे 182 रूपये दिए जाते हैं। इस प्रकार से 100 दिनों तक काम करने पर उससे 18 हजार 200 रुपये मिलते हैं। इसके साथ ही जिले की कई पंचायतों में आंगनवाड़ी भवन नहीं है, जिनका भी काम शुरू नहीं हो पाया।

इसी तरह कई गांव में श्मशान घाट नहीं होने से लोगों को अंतिम संस्कार में भी काफी दिक्कत आती है। दतिया जनपद में 191 पंचायतें हैं इनमें से कई जगहो पर स्कूलों में बाउंड्री वॉल टूटी फूटी है। इसका कार्य भी नहीं हो पाया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने 15 वां वित्त अभिसरण के तहत इन कार्यों को त्वरित रूप से किए जाने के निर्देश दिए हैं। जिले में अभी तक इस संदर्भ में कोई भी कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। गोशालाओं के निर्माण को लेकर जरूर ही जिला पंचायत व जनपद ने सक्रियता दिखाई है। हाल ही में मुख्यमंत्री के आदेश के बाद लगभग 13 गौशालाओं का कार्य पूरा हो पाया है।

सामग्री पर व्यय का प्रतिशत ज्यादा
जिले में मनरेगा में किए जाने वाले कार्य के तहत जिले में सामग्री पर व्यय किए जाने का प्रतिशत लगभग 40 प्रतिशत है। हालांकि लक्ष्य राज्य सरकार ने तय कर रखा है, किंतु अनेक जिलों में मनरेगा के कामों में सामग्री व्यय मात्र 30 से 35 प्रतिशत ही किया जा रहा है। इसके कारण भी मनरेगा के कार्यों की लागत बढ़ जाती है। नए निर्देशों के अनुसार जिला पंचायत को सामग्री व्यय पर कम खर्च के लक्ष्य दिए गए हैं और इसे कम करने के लिए कहा गया है।

योजनाओं के लक्ष्य प्राप्त नहीं

जिला पंचायत द्वारा संचालित पशुपालन परियोजना, आजीविका मिशन, समूह केटल शेड व बकरी पालन शेड के अलावा स्वयं सहायता समूह आदि अनेक योजनाओं के लक्ष्य अभी पूरे नहीं हो पाए हैं। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रशासनिक अमला लगा हुआ है। खासकर गोशालाओं के विस्तारीकरण और उनके निर्माण पर जिला पंचायत ज्यादा ध्यान दे रहा है। अन्य जिलों की तुलना में दतिया में इसके लिए बेहतर काम हुआ है।

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