नई दिल्ली । केंद्र की मोदी सरकार ने पार्लियामेंट में किसानों को लेकर तीन बिल पास कराए हैं। जिनपर राष्ट्रपति ने दस्तखत भी कर दिए हैं और अब यह तीनों बिल कानून बन चुके हैं। इन बिलों के विरोध में विपक्षी पार्टियां और किसान मैदान में उतर आए हैं। साथ ही पंजाब में किसानों ने रेल रोको आंदोलन किया हुआ है। आखिर कृषि बिल का विरोध क्यों हो रहा है। यह सवाल मन में पैदा होता है, तो आइए हम आपको बताते हैं कि इन तीनों बिलों में ऐसा क्या है और क्यों किसान विरोध कर रहे हैं।
पहला बिल
केंद्र सरकार ने इस बिल में किसानों को अपनी फसल देश में कहीं भी बेचने के लिए स्वतंत्र किया है। साथ ही एक प्रदेश के अंदर दो प्रदेशों के बीच कारोबार बढ़ाने की बात भी कही जा रही है। इसके अलावा मार्केटिंग और ट्रांस्पोर्टिशन पर भी खर्च कम करने की बात कही गई है।
दूसरा बिल
इस बिल में सरकार ने कृषि करारों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का प्रोविज़न किया है। यह बिल कृषि पैदावारों की बिक्री, फार्म सर्विसेज़, कृषि बिजनेस फर्मों, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और एक्सपोर्टर्स के साथ किसानों को जुड़ने के लिए मज़बूत करता है। कांट्रेक्टेड किसानों को क्वॉलिटी वाले बीज की सप्लाई करना, तकनीकी मदद और फसल की निगरानी, कर्ज़ की सहूलियत और फसल बीमा की सुविधा मुहैया कराई गई है।
तीसरा बिल
इस बिल में अनाज, दाल, तिलहन, खाने वाला तेल, आलू-प्याज को आवश्यक वस्तुओं की फेहरिस्त से हटाने का प्रोविज़न है। माना जा रहा है कि बिल के प्रोविज़न से किसानों को सही कीमत मिल सकेगी, क्योंकि बाजार में मुकाबला बढ़ेगा।
कृषि बिल के विरोध में अकाली दल ने गठबंधन से तोड़ा नाता
इन बिलों का सबसे ज्यादा विरोध पंजाब और हरियाणा में हो रहा है। हालांकि राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कई और प्रदेशों में प्रोटेस्ट होने लगे हैं। यहां तक कि भाजपा का साथ देने वाली शिरोमणी पार्टी अकाली दल (शिअद) ने खुद इसकी विरोध करते हुए NDA से नाता तोड़ लिया है। इससे पहले अकाली दल से नरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हरसिमरत कौर ने भी इस्तीफा दे दिया था।
क्यों प्रोटेस्ट कर रहे हैं किसान
इन बिलों को लेकर किसान और विपक्षी पार्टियों का कहना है कि वह मंडी व्यवस्था खत्म कर किसानों को एमएसपी (Minimum Support Price) से सरकार वंचिज करना चाहती है। यानी किसानों को डर है कि उन्हें उनकी फसलों पर मिलने वाला एमएसपी खत्म किया जा रहा है। हालांकि केंद्र सरकार साफ शब्दों में कह रही है कि किसानों का एमएसपी पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी। अब सवाल यह उठता है कि जब कृषि बिल को लेकर किसान खुद विरोध कर रहे हैं, तो ऐसी क्या बात है कि सरकार किसानों की इस मांग की ओर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं कर पाई। विरोध प्रदर्शन इस हद तक पहुंच चुका है कि कुछ किसानों की जान तक चली गई है। बावजूद केंद्र सरकार 9 बार किसानों से बात करने के बाद भी विरोध कर रहे अन्नदाता को संतुष्ट नहीं कर सकी। अभी भी सरकार और किसानों के बीच गतिरोध जारी है। दोनों ही ओर से कोई हल न निकल पाने से यह आंदोलन और आगे बढ़ता हुआ नजर आ रहा है।


