दतिया । जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत मंगलवार को राजगढ़ चौराहे पर तीन दुकानों को हटाने के लिए नगर पालिका, पुलिस व जिला प्रशासन का अमला पहुंचा। जिन्हें देखकर तो वहां मौजूद घर की महिलाएं विरोध करने लगी और छत पर चढ़ गई। इस दौरान महिलाओं ने केरोसिन लेकर खुद को आग लगाने का प्रयास भी किया। इसके बाद कुछ लोगों ने वहां पुलिस से झूमा झटकी करना शुरू कर दी। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान तीन लोगों को हिरासत में लेने के बाद तीनों दुकान जेसीबी से जमींदोज करवा दी।
जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह लगभग 11 बजे नगर पालिका व पुलिस तथा जिला प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी इस अतिक्रमण को हटाने पहुंचे, तो अतिक्रमणकर्ताओं ने विरोध शुरु कर दिया। इसके बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर पूरे क्षेत्र की बिजली भी बंद कराई गई ताकि कोई दुर्घटना ना हो और उस क्षेत्र का आवागमन भी रोक दिया गया।
नोटिस के बाद भी अतिक्रमण न हटाने पर की कार्रवाई
जिला प्रशासन के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि शासकीय भूमि पर 3 दुकानें 667 वर्गफीट पर अवैध तरीके से निर्माण की गई थी। इसके लिए जिला प्रशासन ने पूर्व में एक नोटिस दिया था, जो इस परिवार ने नहीं लिया। इसके बाद दूसरा नोटिस पुलिस के माध्यम से तामील करवाया गया। इस पर भी इन्होंने निर्माण कार्य नहीं रोका तो न्यायालय ने इस संबंध में जिला प्रशासन को स्थगन आदेश भी दिए थे। इस स्थगन आदेश को भी इन दुकान बनाने वालों ने नहीं माना। इसके बाद सोमवार को अंतिम नोटिस देकर मंगलवार को दुकानें तोड़ने की कार्रवाई की गई।
महिलाओं ने छत पर चढ़कर मचाया हंगामा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जोशी परिवार की जब यह दुकानें हटाने के लिए अतिक्रमण विरोधी दस्ता राजगढ़ चौराहे पर पहुंचा, तो परिवार की महिलाएं छत पर चली गई और कूदकर जान देने की बात कहने लगी। इसके अलावा कुछ लोगों ने पेट्रोल, केरोसिन का केन खुद पर डालकर आग लगाने की भी कोशिश की। इसके बाद अतिक्रमण करने वाले रविंद्र जोशी पुत्र पप्पू जोशी, छोटू जोशी पुत्र पप्पू जोशी तथा स्वयं पप्पू जोशी भी पुलिस के साथ झूमा झटकी करने लगे। यह ड्रामा लगभग 3 घंटे से अधिक समय तक चला। इससे यहां काफी मात्रा में लोग एकत्रित हो गए। पुलिस को वनवे मार्ग के अावागमन को डायवर्ट करना पड़ा। बाद में अतिक्रमणकर्त्ता नहीं माने तो पुलिस ने उक्त तीनों को हिरासत में लेकर केस दर्ज कर लिया है और उसके बाद इनकी तीनों दुकानें तोड़ दी गई।
इस मामले में प्रभारी तहसीलदार नीतेश भार्गव ने बताया कि तीनों दुकानें बनाने से पूर्व ही प्रशासन ने इन्हें नोटिस दे दिया था। दुकान निर्माण बंद करने को लेकर भी कोर्ट ने भी स्थगन आदेश तक दिया था, किंतु इन्होंने शासकीय जमीन पर यह निर्माण कर लिया। इसके बाद अंतिम नोटिस देने के बाद जिला प्रशासन को इसे तोड़ने की कार्रवाई करना पड़ी।

