किसान आंदोलन लंबा चलने के टिकैत ने दिए संकेत, देशभर में घूमकर जुटा रहे समर्थन

प्रयागराज । कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसान अपनी यह लड़ाई लंबी ले जाने के मूड में है। इस बात के संकेत पश्चिम बंगाल से वापिस लौटकर आए किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने दिए हैं। उन्होंने किसानों के हक के आंदोलन को साल के अंत तक ले जाने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि जब तक सरकार किसानों की बात नहीं मान लेती, आंदोलन रुकने वाला नहीं है।

वहीं अब किसान आंदोलन की हवा पश्चिम बंगाल चुनाव तक पहुंचने लगी है। वहां भी किसानों से आंदोलन के पक्ष में समर्थन मांगा जा रहा है। वहीं मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी किसानों का पक्ष लिया है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि आंदोलन कर रहे किसान खाली हाथ वापिस न लौटें, यह देखना सरकार का काम है।

केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में भारतीय किसान यूनियन की अगुवाई में चल रहे किसान आंदोलन (Farmers Protest) के इस साल दिसंबर तक चलने की संभावना की बात भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने रविवार को कही। वह पश्चिम बंगाल का दौरा करने के बाद रविवार को प्रयागराज पहुंचे थे। टिकैत ने झलवा में मीडिया से कहाकि सरकार न मानी तो नवंबर-दिसंबर तक इस आंदोलन के चलने की उम्मीद है।

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के पूर्व अपने बंगाल दौरे के बारे में टिकैत ने बताया कि दिल्ली से सरकार के लोग पश्चिम बंगाल में किसानों से एक मुट्ठी अनाज मांग रहे हैं। हमने किसानों से कहा कि जब वे चावल दें तो अनाज मांगने वालों से कहें कि वे इस पर एमएसपी भी तय करवा दें और 1850 रुपये का भाव दिला दें। उन्होंने कहा कि कल हम बंगाल में थे। पूरे देश में जा रहे हैं। हम किसानों से एमएसपी का कानून बनवाने की मांग करने के लिए कह रहे हैं। अभी बिहार में धान 700-900 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदा गया। हमारी मांग है कि एमएसपी का कानून बने और इससे नीचे पर खरीद ना हो।

टिकैत ने कहाकि हम दिल्ली में ही रहेंगे। पूरे देश में हमारी बैठकें चल रही हैं। हम 15 मार्च को मध्यप्रदेश में रहेंगे फिर 17 मार्च को गंगानगर में और 18 तारीख को फिर गाजीपुर बार्डर चले जाएंगे। इसके बाद 19 को ओडिशा में रहेंगे और 21-22 को कर्नाटक में रहेंगे। उन्होंने कहाकि नए कानून से छोटे दुकानदार खत्म हो जाएंगे। केवल दो मॉल रहेंगे। व्यापारी वर्ग खत्म होगा, लघु उद्योग खत्म हो जाएंगे। वालमार्ट जैसी कंपनियों के आने से साप्ताहिक बाजार खत्म हो जाएंगे।  

टिकैत ने आरोप लगाते हुए कहाकि यदि सरकार किसी पार्टी की होती तो वह बातचीत कर लेती, लेकिन इस सरकार को तो बड़ी कंपनियां चला रही हैं। देश का बैंकिंग क्षेत्र, एलआईसी, हवाई अड्डे…आदि सब कुछ बिक गया। अगर जनता पंखे और एसी में सोती रही तो एक दिन ऐसा आएगा की अपने स्वार्थ के लिए कुछ लोग देश भी बेच देंगे। इससे पूर्व टिकैत ने झलवा में टिकैत पार्क में स्थित महेंद्र सिंह टिकैत की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अनुज सिंह और अन्य किसान नेता मौजूद रहे।

मेघालय के राज्यपाल की बातों में झलका किसानों के लिए दर्द

इधर बागपत में किसान आंदोलन को लेकर मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी बयान दिया है। उनके बयान में किसानों के प्रति दर्द छलकता दिखाई दे रहा है। उन्होंने अपने बयान में कहाकि आंदोलन कर रहे किसान दिल्ली से खाली हाथ न लौटें। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों को लेकर मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने केंद्र सरकार पर भी उठाए सवाल हैं।

उन्होंने कहा कि बिना जानें समझे ही किसानों का बुरा हाल हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस देश में किसान खराब हाल में है। देश का किसान जब तक असंतुष्ट रहेगा, तब तक देश सर्वाइव नहीं करेगा। मलिक ने एमएसपी को कानूनी मान्यता देने की भी वकालत की। उन्होंने कहाकि मैं चाहता हूं ये मसला हल हो जाए और जहां तक जरूरत पड़ेगी वहां तक जाऊंगा।

उत्तर प्रदेश के अपने गृह जनपद बागपत पहुंचे राज्यपाल सत्यपाल मलिक की जुबां पर किसानों का दर्द छलक पड़ा। दरअसल, राज्यपाल मलिक बागपत के अमीनगर सराय कस्बे में एक अभिनंदन समारोह में पहुंचे थे। वहां लोगों को संबोधित करते हुए मलिक ने कहा कि किसानों के मसले पर उन्होंने पीएम और गृहमंत्री से भी बात की थी। बतौर मलिक उन्होंने किसानों को दिल्ली से खाली हाथ नहीं जाने देने और उन पर लाठीचार्ज नहीं कराने को कहा था।

गवर्नर मलिक ने किसान आंदोलन और चुनावी घमासान के बीच ऐसा क्यों कहा और उनके इन बयानों के क्या मायने हैं, इसको लेकर सियासी चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। उनके इस भाषण से सरकार की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। बता दें कि सत्यपाल मलिक का एक साल में तीन बार तबादला हो चुका है। 30 सितंबर, 2017 को सत्यपाल मलिक को बिहार का राज्यपाल बनाया गया था, लेकिन एक साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें 23 अगस्त 2018 को जम्मू-कश्मीर का उप राज्यपाल बना दिया गया था। बाद में उन्हें 30 अक्टूबर 2019 को गोवा का राज्यपाल बनाया गया था, फिर तबादला कर मेघालय भेज दिया गया था।

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