बैंकों पर लटके रहे ताले, हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने की जमकर नारेबाजी, निजीकरण पर जताया विरोध

दतिया ।  सोमवार को बैंकों की देशव्यापी हड़ताल के चलते पूरे जिले की सभी बैंक शाखाओं पर ताले लटके रहे। सेंट्रल बैंक ऑफिसर्स यूनियन ने सरकार की जनविरोधी नीतियों व देश की सरकारी बैंकों के निजीकरण के विरोध में पूरे देश में राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की थी। हड़ताल दो दिवसीय रहेगी। इसके मद्देनजर दतिया शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में 15 मार्च सोमवार को अखिल भारतीय बैंक हड़ताल के प्रथम दिन सभी बैंक कर्माचरियों ने तख्तियां दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया और बैंक की मुख्य शाखा के बाहर नारेबाजी कर निजीकरण से होने वाले नुकसान को बताया। मंगलवार को भी बैंक बंद रहेंगे।

इस अवसर पर बैंक कर्मचारियों और पदाधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीयकृत बैंकों के निजीकरण किए जाने के केंद्रीय सरकार के प्रयासों का बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल के माध्यम से पुरजोर विरोध किया है। कर्मचारियों ने बताया कि सरकार द्वारा अपने वित्तीय बजट में दो सरकारी बैंकों का निजीकरण कर उन्हें कारपोरेट घरानों को बेचने का प्रस्ताव लाया गया है व अन्य सरकारी उपक्रमों को बेचकर प्राइवेट लोगों को सौंपने का निर्णय लिया जा रहा है। अब सरकार द्वारा 2 से बढ़ाकर 4 बैंको का निजीकरण किया जा रहा। जो आम जनता की जमा पूंजी के साथ खिलवाड़ है।

बैंक देश की धरोहर है, जिन्हें 19 जुलाई 1969 में इंदिरा गांधी की सरकार ने पूंजीपतियों से लेकर आम जनता को सरकारीकरण करके सौंपा था। आज सरकार उसके विपरीत पुनः सरकारी बैंकों व उपक्रमों को पुनः प्राइवेट लोगो को सौंपने की तैयारी में है। देश की जनता की 95 प्रतिशत पूंजी सरकारी बैंकों में जमा है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है। निजीकरण के बाद बैंक शाखाओं को बंद किया जाएगा जिससे बेरोजगारी भी बढ़ेगी।

आम जनता को अधिक खर्चो पर बैंकिग सुविधाएं मिल पाएंगी। ज़ीरो बैलेंस पर गरीब लोग खाते नहीं खोल पाएंगे व बेरोजगारों को लोन नहीं मिल पाएंगे। अत: ऐसी स्थिति में बैंकों का निजीकरण बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए। इस दौरान दतिया में बैंक कर्मचारियों तख्तियां हाथ में लेकर नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहेगा।

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