मुंबई। महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर लगे आरोपों का मसला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है । आरोप लगाने वाले पूर्व सीपी परमबीर सिंह ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी।बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने ये मामला सुना
जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस ह्रषिकेश रॉय की बेंच ने कहा कि मामले में लगाए जा रहे आरोप प्रत्यारोप बेहद गंभीर हैं। हालांकि कोर्ट ने मामले में सुनवाई से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बेहतर होगा कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह अपनी याचिका बंबई उच्च न्यायालय में दायर करें। अदालत ने टिप्पणी की कि परमबीर सिंह ने याचिका में जिन निर्देशों की मांग की है उन सभी मामलों में बंबई उच्च न्यायालय सुनवाई कर सकता है। परमबीर सिंह ने दो साल का तय कार्यकाल पूरा होने से पहले अपने ट्रांसफर को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन बताया। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि लगभग सभी राज्यों में पुलिस सुधार पर अमल के कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होता है। लेकिन राजनैतिक संकट पैदा होने पर ही अदालत में इस मामले को उठाया जाता है। अपनी याचिका में परमबीर सिंह ने अपने तबादले को रद्द करने और गृहमंत्री अनिल देशमुख के घर की सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित करने की मांग की गई थी।
बाद में परमबीर सिंह की ओर से बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सुनवाई की मांग की गयी है।उधर एंटीलिया के बाहर मिली कार में जिलेटिन मिलने के मामले से जुडे मनसुख हिरेन की संदिग्ध की मौत की जांच कर रही महाराष्ट्र एटीएस को झटका लगा है । दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस केस की जांच एनआईए को सौंप दी थी, जिसके खिलाफ महाराष्ट्र एटीएस कोर्ट चली गई थी. ठाणे कोर्ट ने महाराष्ट्र एटीएस को मनसुख केस की जांच फौरन रोक देने और सभी दस्तावेज एनआईए को सौंपने का आदेश दिया है ।
राज्य में जारी सियासी भूचाल के बीच बुधवार को उद्धव मंत्रिमंडल की बैठक हुई । माना जा रहा है कि इसमें अनिल देशमुख के मामले पर भी चर्चा हुई । तमाम आरोप प्रत्यारोपों और कानूनी दांवपेंच अपनी जगह हैं लेकिन जिस तरह से महाराष्ट्र सरकार के गृहमंत्री पर आरोप लगे हैं उससे गठबंधन सरकार की साख पर सवाल तो उठ ही रहे हैं ।


