ग्वालियर । ग्वालियर व्यापार मेला इस बार अपनी निर्धारित समय सीमा से पहले समाप्त करा दिया गया। कोरोना संक्रमण का असर मेला पर पड़ा है। संक्रमण के बढ़ने पर यह कदम उठाया गया। मेला करीब 18 दिन पहले समाप्त कराया गया है। शासन प्रशासन के निर्णय से जहां दुकानदार मायूस दिखाई दिए वहीं कोरोना से बचाव के लिए उठाए गए इस कदम को सही भी ठहराया जा रहा है। मेला 15 अप्रैल तक चलने की घोषणा उसके शुभारंभ अवसर पर की गई थी। लेकिन कोरोना के कारण यह संभव नहीं हो सका।
व्यापार मेला के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब मेले को 18 दिन पहले ही समाप्त कर दिया गया हो। कोविड के चलते शासन को ऐसा निर्णय लेना पड़ा है। 42 दिन में भी व्यापार मेला में 850 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ है। इनमें से 811.76 करोड़ का कारोबार तो ऑटोमोबाइल सेक्टर में हुआ है। शेष 38.24 करोड़ रुपए में पूरा मेला सिमटकर रह गया है। मेला में 15836 वाहन बिके हैं। इनमें भी 7974 दोपहिया और 7862 चार पहिया वाहन हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में लगभग 5 करोड़ रुपए का कारोबार ही हो पाया है। जिला प्रशासन ने मेला में आने वाले व्यापारियों को 28 मार्च का समय दिया था। इसके बाद धीरे-धीरे व्यापारी भी मेला प्रांगण से रुखसत होने लगे हैं।
कोरोना संक्रमण के चलते साल 2020 में बिल्कुल भी व्यापार नहीं हो पाया था। जब साल 2021 का आगमन हुआ तो शासन माधवराव सिंधिया व्यापार मेला को लगाने के लिए इच्छुक नहीं था, लेकिन व्यापारियों के लगातार प्रदर्शन और मांग के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 15 फरवरी से 15 अप्रैल के बीच दो महीने के लिए मेला की विधिवत घोषणा की थी। खुद सीएम शिवराज और राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर व्यापार मेला का उद्घाटन किया था। उस समय कोरोना संक्रमित काफी कम आ रहे थे। कभी एक या दो संक्रमित निकल रहे थे, लेकिन मार्च 2021 की शुरुआत से ही संक्रमण फिर पांव पसारने लगा।
महाराष्ट्र में कोरोना की दूसरी लहर का असर मध्य प्रदेश के भी बड़े शहरों में दिखाई देने लगा। इसमें ग्वालियर भी शामिल है। यहां हर दिन के साथ कोरोना बढ़ता गया तो मेला में जहां हजारों लोग एक साथ घूमते हैं, उसे भी सीमित करने का निर्णय लिया गया। जो मेला 15 अप्रैल तक चलना था उसे 28 मार्च तक ही समाप्त करने की घोषणा कर दी गई।
चेंबर आॅफ कामर्स ने की व्यापारियों के लिए मांग
मप्र चेंबर ऑफ कॉमर्स ने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया और सांसद विवेक शेजवलकर को पत्र लिखा है। मानसेवी सचिव डा. प्रवीण अग्रवाल ने बताया कि मेला अवधि 15 अप्रैल तक तय थी। अब कोरोना के कारण मेला 28 मार्च को खत्म हो गया है। ऐसे में वाहन बिक्री पर 15 अप्रैल तक आरटीओ शुल्क में छूट दी जाए, जिससे व्यापारियों को राहत मिल सके।
इन सेक्टर में हुआ यह कारोबार
* कोरोना आपदा के बीच 42 दिन लगे ग्वालियर व्यापार मेले में 811.76 करोड़ रुपए के 15836 वाहन बिके। इससे परिवहन विभाग को 41.46 करोड़ रुपए टैक्स मिला। इस बार मेला में 7974 दोपहिया और 7862 चार पहिया वाहन बिके। दो वाहन तो एक-एक करोड़ से ज्यादा के बिके हैं।
* इस साल मेला की बिक्री पिछले साल 59 दिन के मेले के मुकाबले कम रही, यदि मेला 15 अप्रैल तक लगता तो नया रिकॉर्ड बन सकता था। पिछले साल मेले में बिके वाहनों से परिवहन विभाग को 46.89 करोड़ रुपए का टैक्स मिला था और इस बार 41.46 करोड़ मिला है।
* इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर – अभी कुछ कारोबारियों ने शोरूम चालू किए ही थे कि लॉकडाउन में मेला उलझ गया। इस सेक्टर में लगभग 5 करोड़ रुपए का कारोबार ही हो पाया है।
* खानपान सेक्टर – मेला अवधि में यहां 4 करोड़ का कारोबार हो सका है। कोरोना के बढ़ते मरीजों के बाद 28 मार्च को मेला खत्म के निर्देश से व्यापारियों में आक्रोश है।
* मनोरंजन सेक्टर- कोविड संकट के बाद भी मनोरंजन सेक्टर मेला में लगा और खूब कारोबार किया। मनोरंजन सेक्टर में झूला सेक्टर व अन्य संसाधनों से लगभग दो करोड़ रुपए का कारोबार हुआ है।
* शिल्प बाजार – देश के हर राज्य से व्यापारी आए। लोगों ने बड़ी संख्या में खरीदारी की। करीब 2 करोड़ का कारोबार हुआ है।
* अन्य सेक्टर – मेला में सूटकेस, क्रॉकरी, घरेलू सामान, कपड़ा, खिलौने, फर्नीचर सहित अन्य कारोबारियों ने अपनी-अपनी दुकान लगाई थीं। इन दुकानों के माध्यम से 7 करोड़ रुपए का कारोबार हो सका है।
मेला कम समय लगा लेकिन अच्छा हुआ कारोबार
इस संबंध में ग्वालियर व्यापार मेला के सचिव निरंजन श्रीवास्तव का कहना है कि कोविड के बीच मेला लगा और कम समय में भी अच्छा कारोबार हुआ है। सबसे ज्यादा ऑटोमोबाइल सेक्टर ने बिजनेस किया है। कोरोना गाइड लाइन के चलते मेला जल्दी समाप्त करना पड़ा। इसके बावजूद भी कई सेक्टर में अच्छा कारोबार दर्ज किया गया।


