नई दिल्ली । पंतजलि आयुर्वेद से जुड़ी कंपनियों ने रुचि सोया को खरीदने की हाल में घोषणा की है। रुचि सोया कंपनी ने अपने दिवालिया हो जाने की िस्थति में कंपनी को बेचने का फैसला लिया था। इसके बाद पतंजलि अायुर्वेद से जुड़ी कंपनियों ने रुचि सोया को खरीदने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद रुचि कंपनी के शेयरधारकों ने राहत जताई है।
साल 2019 में दिवालिया हो चुकी रुचि सोया को पतंजलि आयुर्वेद के नेतृत्व वाले कंपनियों के एक समूह ने खरीदने की घोषणा की तो उस समय निवेशकों और शेयरधारकों को काफी राहत मिली। 4,350 करोड रुपए का यह सौदा वास्तव में भारत में दिवालियापन समाधान की सक्सेस स्टोरी से जुड़ा एक बेहतरीन मामला है।
इसके बाद हालांकि जो हुआ उससे कई लोगों की भौहें टेढ़ी हो गई है। 17 नवंबर 2020 को रुचि सोया ने शेयर बाजार को दी गई एक जानकारी में कहा था कि कंपनी ने 28 मार्च 2020 से अपनी पांच सहयोगी इकाइयों को बंद कर दिया है। यह सभी सहयोगी इकाइयां सनातन मल्टी स्किल डेवलपमेंट एंड एजुकेशन को बेच दी गई है।
इन पांच सहयोगी इकाइयों में रुचि वर्ल्ड वाइड भी शामिल थी। जिसमें रुचि सोया की 52.3 फ़ीसदी हिस्सेदारी है। रुचि सोया की अन्य सहयोगी इकाइयों में आरएसआईएल होल्डिंग, मृग ट्रेडिंग और दो विदेशी सहयोगी कंपनियां रुचि इंडस्ट्रीज लिमिटेड और रुचि इथियोपिया होल्डिंग्स लिमिटेड शामिल है।
शेयर बाजार को दी गई जानकारी में हालांकि इस डील के साइज के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। इसके कुछ दिन बाद शेयर बाजार को दी गई दो अलग-अलग जानकारी में कंपनी ने यह बताया कि डील कितने में हुई है। इस जानकारी में कहा गया कि रुचि वर्ल्ड वाइड को सिर्फ ₹100 में बेच दिया गया है। जबकि आरएसआईएल होल्डिंग्स को 3.55 करोड़ रुपये में बेचा गया है।
शेयर बाजार को दी गई जानकारी में यह भी बताया गया है कि यह कोई स्लम सेल नहीं है और ट्रांजैक्शन वास्तव में समाधान प्रक्रिया के तहत ही किया गया है। इसमें आगे यह भी कहा गया है कि खरीदार कंपनी प्रमोटर ग्रुप या प्रमोटर ग्रुप की कंपनियों में शामिल नहीं है। रुचि सोया ने हालांकि अब तक इस तरह का कोई डिटेल उपलब्ध नहीं कराया है। साल 2019-20 में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास जो सालाना रिपोर्ट दायर की गई है, उसमें उसने कहा है कि उसने दो विदेशी कंपनियां सिर्फ ₹75 में खरीदी है।
पहली नजर में यह आम बिजनेस ट्रांजैक्शन लगता है जिसमें बिना लाभ वाली संपत्ति को एक कंपनी ने दूसरी कंपनी को बेच दिया है। रुचि इथोपिया होल्डिंग्स दुबई की एक कंपनी है जिसकी दो सहयोगी इकाइयां हैं। इसमें रुचि एग्री पीएलसी इथोपिया और रुचि एग्री सरलू शामिल है। रुचि एग्री सरलू के पास इथोपिया में 25000 हेक्टेयर जमीन है। कंपनी ने अप्रैल 2010 में इथोपिया की सरकार से एमओयू साइन किया था। जिसमें सोयाबीन की खेती और उसके लिए एक प्रोसेसिंग प्लांट लगाने का करार किया गया था।
लीज एग्रीमेंट के हिसाब से कंपनी को साल 2035 तक के लिए यह जमीन लीज पर दी गई थी। इसमें सालाना लीजिंग फीस भी शामिल है। कंपनी के पास यह भी विकल्प है कि वह जब चाहे तब अपने पास मौजूद जमीन के बराबर जमीन और ले सकती है। रुचि सोया ने इथोपिया में 1000 से अधिक जमीन पर सोयाबीन की खेती पहले ही शुरू कर दी है। कंपनी से जुड़े दो लोगों ने इस बात की जानकारी दी है।
रुचि इथोपिया होल्डिंग्स की एक और सहयोगी कंपनी के पास करीब 17000 हेक्टेयर जमीन है। यह जमीन 2012 में लीज पर ली गई थी। सिंगापुर में पंजीकृत रुचि इंडस्ट्रीज की चार सहयोगी कंपनियां हैं। इनमें से एक कंबोडिया रुचि एग्री प्लांटेशन शामिल है जिसके पास करीब 20000 हेक्टेयर जमीन है। यह सभी जमीन रुचि ग्रुप केवल एक्सपेंशन प्लान के हिसाब से खरीदी गई थी। साल 2010 और 2013 के बीच में इसमें $15 करोड़ से अधिक की रकम खर्च की गई थी। अब यह पता लगा है कि सनातन में स्वामी रामदेव के भाई राम भरत और उनकी पत्नी निदेशक हैं।


