दतिया. संकट के समय हिम्मत, धैर्य और थोड़ी सी सूझबूझ के साथ यदि व्यवसाय किया जाए तो जहां व्यवसाय भी ठीक गतिमान रहता है और वहीं दूसरी ओर संकट में प्रगति के अवसर का एक नया नुस्खा भी मिलता है। कोरोना काल में हमारी उपलब्धि यह रही कि सीमित मानव संसाधन में हमने अधिकतम उत्पादन करना सीखा । अपने ग्राहकों से सतत संपर्क कर उत्पादन भी उन तक पहुंचाया। गोविंद मसाले के मालिक संजीव साहू का मानना है कि कोरोना संकट काल में उनका कारोबार इन्हीं के साथ ही आपस में सामंजस्य कर अपने इस उद्योग को ठीक से संचालित कर पाए ।
संजीव बताते हैं कि सन 2005 में उनके पिता केपी साहू ने इस उद्योग को शुरू किया था। इससे पूर्व पिता ने व्यापार के नाम से मसाला पीसने की चक्की खोली थी। वे ग्राहकों से सतत संपर्क में रहे। इन ग्राहकों से आज भी हमारे वही पुराने संबंध हैं। 2012 में मैंने उद्योग को ज्वाइन किया। किसी भी उद्योग में उत्पादन की क्वालिटी और शुद्धता एक निर्णायक मानदंड होती है। कोरोना काल में हमारे इन्हीं मानदंडों के चलते ग्राहकों का विश्वास हम पर बना रहा। इस संकट के समय में भी हमने क्वालिटी का खास ध्यान रखा सबसे खास बात तो यह कि कोरोना संकट के दौरान मसालों की आवश्यकता हर परिवार की थी। हमने उद्योग के उत्पादन को जारी रखते हुए ग्राहकों की इस जरूरत को पूरा किया ।
25 फीसद कर्मचारियों के साथ किया उत्पादन
लॉकडाउन में कोरोना प्रोटोकॉल पालन करते हुए मात्र 25 फीसद कर्मचारी के साथ ही काम पर लगे और उन्होंने वह उत्पादन दिया जो पूरे स्टाफ होने के बाद दिया जाता था। इस तरह न्यूनतम लेबर में अधिकतम उत्पादन किस प्रकार हो यह कोरोना संकट में ही हमने सीखा है। प्रशासन के सहयोग की बात करें, तो हमने जो ही उद्योग संबंधी जरूरत के अलावा लॉकडाउन के पास आदि की सुविधा मांगी, तो वह तुरंत मुहैया कराई गई। इसके अलावा हमने धनिया, मिर्च, हल्दी और नमक के छोटे-छोटे पैकेट परिवारों की जरूरत के मुताबिक तैयार कर इन मसालों के पैकिटों को दतिया की सामाजिक संस्थाओं की मदद से वितरित किए। ताकि इस आपदा काल में लोगों के हम काम आ सके।

