बीजिंग : चीन सरकार की ओर से शुक्रवार को तिब्बत पर जारी एक श्वेत पत्र के मुताबिक चीन अरुणाचल प्रदेश, भूटान और नेपाल से लगी तिब्बत की सीमा से लगे दूरदराज के गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास के प्रयास तेज कर रहा है। इसके साथ ही चीन ने कहा है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को हमारी मंजूरी होनी चाहिए। तिब्बती धर्मगुरु द्वारा अपना उत्तराधिकारी नामित किए जाने या उनके अनुयायियों द्वारा चुने गए उत्तराधिकारी को मंजूरी देने से इसने इन्कार कर दिया है। श्वेत पत्र में कहा गया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास करना और तिब्बत में लोगों के जीवन में सुधार करना महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि रणनीतिक हिमालयी क्षेत्र 4,000 किलोमीटर लंबी बाहरी सीमा रेखा साझा करता है। निकटवर्ती क्षेत्रों के निवासी कठोर जीवन और काम करने की स्थिति और गरीबी का अनुभव करते हैं। इसमें कहा गया है कि सभी स्तरों पर सरकारें सीमावर्ती क्षेत्रों को विकसित करने और लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। दस्तावेज में कहा गया है कि सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के मार्गदर्शन में तिब्बत में सीमा विकास के लिए वित्तीय आवंटन साल दर साल बढ़ता जा रहा है। 2012 में राष्ट्रपति शी चिनफिंग के सत्ता में आने के बाद से सुरक्षा पर अतिरिक्त जोर देने के साथ नए गांवों की स्थापना करके चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी गई है। भारत-चीन सीमा विवाद में 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) शामिल है, जिसमें से 1,126 किलोमीटर अरुणाचल प्रदेश में स्थित है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत होने का दावा करता है, जिसे भारत ने दृढ़ता से खारिज कर दिया है।
