भूटान में चीनी घुसपैठ : अरुणाचल से लगे भूटान के इलाके में चीन ने गांव बसाया, यहां आर्मी कैंप और पावर प्लांट भी बना दिया

बीजिंग : चीन अपने किसी पड़ोसी की जमीन हथियाने से बाज नहीं आ रहा। नेपाल के साथ भूटान की जमीन पर भी वह वर्षों से धीरे-धीरे करके कब्जा कर रहा है। भूटान के भीतर उसने एक कस्बा भी बना लिया है। यह बात सीमावर्ती इलाके के ताजा सर्वे में सामने आई है। ऑस्ट्रेलिया की वेबसाइट न्यूजडॉटकॉमडॉटएयू के मुताबिक भूटान की सीमा के आठ किलोमीटर भीतर घुसकर चीन ने वहां एक पूरा कस्बा बसा दिया है। इस कस्बे में सड़कें, बिजलीघर, कम्युनिस्ट पार्टी की दो इमारतें, एक संवाद केंद्र और सेना व पुलिस की चौकियां हैं। बीते अप्रैल में चीन ने युन्नान प्रांत के कुनमिंग शहर में एक विदेशी प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया था। इस प्रतिनिधिमंडल के सामने चीनी अधिकारियों ने अपनी दक्षिणी पर्वतीय सीमा के बारे में बताया। इसमें भूटान का बड़ा हिस्सा भी शामिल था। सांस्कृतिक रूप से भूटान के लोग तिब्बत के ज्यादा नजदीक हैं। वे भारत के जितने नजदीक हैं, चीन से उतने ही दूर हैं। यहां तक कि चीन का दूतावास भी भूटान की राजधानी थिंपू में नहीं है। वैसे तो चीन और भूटान की 470 किलोमीटर लंबी सीमा को लेकर दोनों देशों में सहमति है लेकिन चीन अक्सर उसका उल्लंघन करता रहता है। इसी सीमा का उल्लंघन कर चीन भूटान के भीतर घुसा है और वहां पर कस्बे की स्थापना कर डाली है। इस कस्बे को चीन ने ग्यालफुंग नाम दिया है। इसमें करीब एक सौ लोग और कुछ जानवर रहते हैं। यहां पर निर्माण का कार्य लगातार चल रहा है। चीन यहां पर अपनी मौजूदगी मजबूत करता जा रहा है। यही नहीं चीन ने भूटान के साकतेंग वाइल्ड रिजर्व पर अपना दावा ठोक दिया है। यह वाइल्ड रिजर्व चीन सीमा पर स्थित है। चीन ने ऐसा तब किया जब अंतरराष्ट्रीय संगठन दशकों से इस वाइल्ड रिजर्व के लिए भूटान को आर्थिक सहायता दे रहे हैं और वह दुनिया की नजरों में है। लेकिन चीन भूटान में उसका अस्तित्व मानने को तैयार नहीं है। 

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