नई दिल्ली । कोरोना की वैक्सीन लेने वालों की संख्या के मामले में भारत पहले स्थान पर पहुंच गया है। भले ही अमेरिका वैक्सीन के डोज के मामले में पहले स्थान पर बना हुआ है। लेकिन ऐसे लोगों की संख्या वहां भारत से कम हैं, जिन्हें वैक्सीन की कम से कम एक डोज जरूर मिल गई है। वैक्सीन देने के मामले में दुनिया के अन्य देश भारत से काफी पीछे छूट गए हैं। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) और वैक्सीन पर गठित उच्चाधिकार समिति के प्रमुख के अनुसार गुरुवार तक अमेरिका में 16.9 करोड़ लोग ऐसे थे, जिनको वैक्सीन की कम से एक डोज लग चुकी थी। वहीं भारत में ऐसे लोगों की संख्या 17.2 करोड़ थी।
इसी तरह से ब्रिटेन में वैक्सीन की कम-से-कम एक डोज लेने वालों की संख्या 3.9 करोड़ और जर्मनी में 3.8 करोड़ है। दोनों डोज देने वालों में अमेरिका जरूर भारत से आगे बना हुआ है। इसे भारत की एक बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है। भारत की आबादी बहुत ज्यादा है, इसलिए उसके अनुपात में टीकाकरण पीछे दिख सकता है। लेकिन सच्चाई यह है कि वैक्सीन लगाने वाले लोगों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक अपने देश में है। उन्होंने चीन में टीकाकरण के आंकड़ों पर संदेह जताते हुए उससे किसी प्रकार की तुलना को बेमानी बताया है।
टीकाकरण की नीति को सही ठहराते हुए समिति प्रमुख ने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता उस समूह को सबसे पहले टीका लगाने की है, जो कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित होता है और इसमें 45 साल से अधिक उम्र के लोग आते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते 88 फीसद मौतें इसी समूह से हुई हैं। इसी नीति के चलते देश में अब तक 60 साल से अधिक उम्र के 43 फीसद और 45 साल से अधिक उम्र के 37 फीसद लोगों को कम से कम एक टीका लगा चुका है। उन्होंने राज्यों से 45 साल से अधिक उम्र के लोगों के टीकाकरण पर विशेष ध्यान देने की गुजारिश की।


