नई दिल्ली : डोमिनिका हाई कोर्ट ने पड़ोसी देश एंटीगुआ और बरबुडा से रहस्यमय परिस्थितियों में गायब होने के बाद द्वीपीय देश में अवैध रूप से घुसने के मामले में भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को जमानत देने से इन्कार कर दिया है।
चोकसी 2018 से एंटीगुआ और बरबुडा में नागरिक के तौर पर रह रहा है। ‘एंटीगुआ न्यूजरूम’ की खबर के अनुसार हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चोकसी के भागने का खतरा है।
चोकसी ने मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद हाई कोर्ट का रुख किया था। गीतांजलि जेम्स और भारत में अन्य मशहूर हीरा आभूषण ब्रांडों के मालिक चोकसी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 13,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आने से कुछ सप्ताह पहले देश से फरार हो गया था।
मामले में चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी की कथित संलिप्तता उजागर हुई थी। 62 वर्षीय चोकसी के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी किया गया। वह 23 मई को रहस्यमय परिस्थिति में एंटीगुआ और बरबुडा से गायब हो गया था।
उसे अपनी कथित प्रेमिका के साथ पड़ोसी द्वीपीय देश डोमिनिका में अवैध रूप से घुसने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। चोकसी के वकीलों ने आरोप लगाया कि एंटीगुआई और भारतीय जैसे दिखने वाले पुलिसकर्मियों ने एंटीगुआ के जौली हार्बर से उसका अपहरण किया और नौका से डोमिनिका ले गए।
बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले की सुनवाई कर रहे हाई कोर्ट के न्यायाधीश बर्नी स्टीफेंसन के आदेश पर चोकसी को अवैध प्रवेश के आरोपों का जवाब देने के लिए रोसियू मजिस्ट्रेटी अदालत में पेश किया गया, जहां उसने अपना गुनाह कबूल नहीं किया। अधिकारियों ने यहां बताया कि सीबीआइ और विदेश मंत्रालय ने डोमिनिका हाई कोर्ट में दो हलफनामे दाखिल कर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में पक्ष बनाए जाने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी चोकसी की आपराधिक जवाबदेही, भगोड़ा मामले की स्थिति, उसके खिलाफ लंबित वारंट, रेड नोटिस और चार्जशीट दायर करने पर ध्यान केंद्रित करेगी, जबकि विदेश मंत्रालय यह तर्क देगा कि चोकसी की भारतीय नागरिकता बनी रहेगी। अगर हलफनामे को स्वीकार कर लिया गया तो प्रसिद्ध वकील हरीश साल्वे के डोमिनिका में भारतीय पक्ष की पैरवी करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

