पंजाब : 25 साल बाद फिर साथ आए शिअद-बसपा, पहली पारी की सफलता दोहराने की चाह में बसपा

चंडीगढ़ : पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच शनिवार को 25 वर्ष बाद दोबारा गठबंधन हो गया है। राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से बसपा 20 और शिअद 97 सीटों पर चुनाव लड़ेगा।

गठबंधन का एलान शिअद के प्रधान सुखबीर सिंह बादल और बसपा नेता सतीश मिश्रा ने किया। शिअद और बसपा आपस में तालमेल के लिए राज्य व जिला स्तरीय कमेटियां बनाएंगी। एलान के तुरंत बाद पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने बसपा सुप्रीमो मायावती को पंजाब से चुनाव लड़ने का न्योता दिया।

भाजपा के हिस्से की 12, अपनी आठ सीटें शिअद ने दीं बसपा को 12 ऐसी सीटें लड़ने के लिए मिली हैं जहां पर शिअद-भाजपा गठबंधन के समय भाजपा चुनाव लड़ती थी। इन सीटों पर शिअद ने जनाधार मजबूत नहीं किया इसलिए उसे उम्मीदवार नहीं मिल रहे थे। अपने हिस्से में से दी गई आठ सीटों में से पांच सीटों पर शिअद को बीते कई चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है। फिल्लौर, बंगा, बलाचौर और आदमपुर चार ऐसी सीटें हैं जहां बसपा का अच्छा आधार है लेकिन वह उसे नहीं दी गईं।

इससे बसपा के काडर में नाराजगी है। करवट ले रही पंजाब की राजनीति: पंजाब में राजनीति करवट ले रही है। हर पार्टी की निगाह अनुसूचित जाति के वोटों पर है। भाजपा अनुसूचित जाति के चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा कर चुकी है। शिअद ने भी अनुसूचित जाति से उपमुख्यमंत्री बनाने की घोषणा की है।

आम आदमी पार्टी ने अनुसूचित जाति के वोट भुनाने के लिए हरपाल चीमा को विपक्ष का नेता बनाया। कांग्रेस भी अनुसूचित वोट बैंक को लुभाने की कोशिश कर रही है। 2019 में बढ़ा बसपा का वोट शेयर: बसपा का 2017 विधानसभा चुनाव में वोट शेयर 1.50 फीसद था जो 2019 के लोकसभा चुनाव में 3.52 फीसद हो गया।

दोआबा क्षेत्र के साथ ही फिरोजपुर की सीटों पर भी बसपा की निगाह है। बादल की मायावती से फोन पर बात: बसपा नेता सतीश मिश्रा ने प्रकाश सिंह बादल से मायावती की फोन पर बात करवाई। बादल ने गठबंधन की बधाई दी। मायावती ने उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा।

सतीश मिश्रा ने कहा कि गठबंधन का एलान करने मायावती को आना था, परंतु कोरोना के कारण ज्यादा भीड़ न जुटे इस कारण वह नहीं आईं। उन्होंने कहा कि शिअद और बसपा की सोच एक जैसी है। तीन कृषि सुधार कानूनों को लेकर दोनों का एक ही स्टैंड है। बसपा ने राज्यसभा में इसका खुलकर विरोध किया है।

उत्तर प्रदेश में भी हम किसानों से कह चुके हैं कि हमारी सरकार आने पर इन कानूनों को लागू नहीं होने दिया जाएगा। आम आदमी पार्टी (आप) पर हमला करते हुए मिश्रा ने कहा कि आप ने पहले इन कानूनों का समर्थन किया लेकिन किसानों का आंदोलन देखते हुए पलटी मार ली। ऐसे लोगों से बचने की जरूरत है।

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