NATO देशों ने चीन को बताया बड़ा खतरा, अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने कहा-डरने की जरूरत नहीं

रायटर : चीन के इर्द-गिर्द अमेरिका, जी 7 और यूरोप का शिकंजा कसता जा रहा है। अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) ने चीन को आक्रामक व्यवहार वाला और गंभीर चुनौती करार दिया है।

नाटो के मुख्यालय पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूरोप की रक्षा को अमेरिका की पवित्र जिम्मेदारी बताया। कहा, पूरा यूरोप समझ ले कि अमेरिका मौजूद है। उसके रहते यूरोप को कुछ नहीं हो सकता। नाटो का हमारे लिए बहुत महत्व है। बाइडन का यह वक्तव्य पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के उलट है जिन्होंने यूरोप की सुरक्षा से पीछे हट जाने की चेतावनी दी थी।

इस मौके पर जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने कहा, बाइडन का आना नए अध्याय की शुरुआत है। बाइडन ने कहा, रूस और चीन उस रास्ते पर नहीं चल रहे जिसकी हमने बीती सदी के आखिरी दशक में कल्पना की थी। दुनिया का मानना था कि दोनों देश उदारवादी लोकतंत्र के रास्ते पर चलेंगे और दुनिया से खतरा कम होगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

चीन हमारा अच्छा व्यापार सहयोगी नहीं बन पाया। इसके चलते नाटो के सदस्य देशों ने उसे साजिशों वाला प्रतियोगी करार दिया है। नाटो के महासचिव जेंस स्टॉटेनबर्ग ने कहा, चीन बाल्टिक सागर से लेकर अफ्रीका तक अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। इसलिए नाटो को सतर्क हो जाना चाहिए।

चीन हमारे नजदीक आता जा रहा है। यहां तक कि अंतरिक्ष में भी। हमारे देशों में भी चीन बड़ा निवेश कर अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। वह दूरसंचार और बंदरगाहों के विकास जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश कर रहा है। हमें सतर्क हो जाने की जरूरत है। हमें मिलकर उसे जवाब देने की जरूरत है।

नाटो महासचिव ने यूक्रेन के नजदीक रूसी सैन्य जमावड़े पर भी चिंता जताई। ईयू सम्मिट में आए ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा, बीजिंग के साथ रिश्ता रखने में खतरा और फायदा, दोनों हैं। यह हम सभी को दिमाग में रखना चाहिए। उल्लेखनीय है कि नाटो में 30 देश शामिल हैं जिनमें लगभग सभी यूरोपीय देश हैं।

इससे पहले जी 7 देशों ने शिनजियांग में मानवाधिकारों और हांगकांग में लोकतंत्र की मांग को कुचलने तथा श्रमिकों की बुरी दशा को लेकर चीन को घेरा था। लंदन स्थित चीनी दूतावास ने सोमवार को इस पर विरोध व्यक्त किया। कहा कि अमेरिका और कुछ अन्य देशों का यह गलत आकलन है। चीन का बढ़ता कदम इन देशों को हजम नहीं हो रहा। –

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