दतिया । प्रदेश की सीमा से लगे उप्र के झांसी जिले से इन दिनों पेट्रोल की तस्करी भारी मात्रा में की जा रही है। इसके चलते कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। शहर व ग्रामी्ण इलाकों में गैराज वाले, मैकेनिक, ऑटो पार्ट्स और किराना व्यवसाई तक भी जगह-जगह इस तरह का अवैध पेट्रोल बेच रहे हैं। उप्र और मप्र में पेट्रोल के दामों में लगभग 12 से 15 रूपये का अंतर होने के कारण इन दिनों यह तस्करी जोरों पर है।
मोटर साइकिलों पर दूध की टंकियों जैसी 40-40 लीटर क्षमता की चार टंकियों (लगभग 160 लीटर) में पेट्रोल और डीजल को ढोकर दतिया लाया जाता है। यदि इतनी बड़ी मात्रा में लदी पेट्रोल से भरी बाइक किसी वाहन से टकराए तो जाहिर है कि उस हादसे की सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। ऐसा नहीं की प्रदेश के सीमावर्ती थानों को इसकी जानकारी नहीं है। इसमें चिरूला तथा उनाव थाने की चेक पोस्ट से होकर ही ये पेट्रोल से लदी मोटर साइकिले दतिया में आती है। अत: पुलिस की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता है। पुलिस अधिकारी इस मामले में पता लगाने की बात कह रहें है। शायद इन्हें भी किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
बड़े मुनाफे के चक्कर में छोटे दुकानदार दतिया शहर में जगह-जगह आग ढेर लिए बैठे हैं। इन पर जिला प्रशासन कोई कार्रवाई कर रहा है और ना ही पुलिस प्रशासन। कोई भी विभाग इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं। खाद्य आपूर्ति विभाग को जैसे इससे कोई मतलब ही नहीं है। खासकर सीमावर्ती थाने उन्नाव और चिरूला क्षैत्र में पेट्रोल तस्करी का कारोबार बहुत तेजी से चल रहा है।
एक बार में एक मोटरसाइकिल पर लगभग 160 लीटर पेट्रोल अथवा डीजल को प्रदेश की सीमा से लगे उप्र के झांसी के पेट्रोल पंप से लाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार नेशनल हाईवे-75 पर यह काम पुलिस की जानकारी में भी है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका पुलिस की है। इतनी बड़ी मात्रा में ज्वलनशीन पदार्थ मोटरसाइकिलों पर लाया जाना कभी भी हाई-वे पर किसी बड़े हादसे को जरूर दे सकता है।
एक लीटर पेट्रोल पर 15 रूपये तक का मुनाफा
उत्तर प्रदेश के झांसी में प्रदेश की सीमा से लगे हुए पेट्रोल पंप 93 रूपये प्रति लीटर के हिसाब से मिल रहा है, वही दतिया शहर में ₹103 रूपये प्रति लीटर के करीब पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल की बिक्री हो रही है। इस तरह से 10 रूपये सीधे उत्तर प्रदेश से लाकर बेचने में है और ग्रामीण क्षेत्रों में इस मूल्य से पांच से सात रूपये ऊपर लिए जा रहे हैं ऐसे में खुले में पेट्रोल बेचने वाले एत लीटर पेट्रोल पर लगभग 15 से 17 रुपए तक कमा रहे हैं। यह मुनाफा कभी भी बड़ा हादसा हादसे को जन्म दे सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पेट्रोल के सर्वाधिक बिक्री
ग्रामीण क्षेत्रों में झांसी से लाकर पेट्रोल बेचने की सर्वाधिक दुकानें हैं। इनमें उनाव बालाजी, सरसई, चिरूला सहित आसपास के गांव में लगभग सभी छोटी छोटी दुकानों पर अवैध पेट्रोल की बिक्री की जा रही है। इसके अलावा कुछ लोग भांडेर में भी यह काम कर रहे हैं। जिसकी कोई देखने वाला नहीं है।
यूपी के पेट्रोल पंप वाले भी करते हैं पुलिस की सेवा चाकरी
चिरूला से लगभग दो किलोमीटर दूर लगे उ.प्र. का सीमा में दो पेट्रोल पंप है। जहां से यह पेट्रोल लाया जाता है। यदि हम इन दोनों पेट्रोल पंप की बिक्री का आंकड़ा देखें तो लगभग 10 से 12 के.एल. (किलो लीटर- लगभग 16 हजार लीटर) बिक्री प्रतिदिन होती है। जबकि दतिया शहर से लगे अन्य पेट्रोल पंप अब लगभग बंद होने की कगार पर आ गए हैं।
यदि म.प्र. की सीमा से लोगो यह पेट्रोल नहीं खरीदे तो इन पंपों को बि्क्री मात्र एकाध हजार लीटर के बिक्री ही हो सकती है। ऐसे पुलिस आदि इन्हें रोके नहीं इस लेकर उ.प्र. सीमा के पेट्रोल पंप के मालिक दतिया के चिरूला थाने की सेवापानी करते रहते है। इस कथित पेट्रोल की तस्करी के मामले की सारी जानकारियां सीमावर्ती थाने उनाव और चिरूला के पुलिसकर्मियों तो भी है।
बताया जाता है कि एक दो बार इस अवैध पेट्रोल परिवहन को पुलिस ने रोका भी था मगर इसके बाद झांसी से लगे पेट्रोल पंप मालिकों ने जब इस संदर्भ में पुलिस से बातचीत की, तो शायद मामले का सेटलमेंटहो गया और उसके बाद खुलेआम पेट्रोल का अवैध परिवहन होने लगा है।

