चंडीगढ़ : पंजाब सरकार की ओर से दो कांग्रेस विधायकों के बेटों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दिए जाने के फैसले में विवाद बढ़ता जा रहा है।सोमवार को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए जनहित याचिका में मांग की गई है कि विधायक फतेहजंग सिंह बाजवा और राकेश पांडे के बेटों को सरकारी नौकरी देने के फैसले को रद किया जाए।
बाजवा के भाई और पंजाब के कद्दावर कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा ने भी दोनों विधायकों से बेटों को सरकारी नौकरी के प्रस्ताव स्वीकार न करने के लिए कहा है।
मामले में प्रदेश के अन्य शहीदों के स्वजन भी विरोध कर रहे हैं। बता दें, फतेहजंग बाजवा के बेटे अर्जुन बाजवा और विधायक राकेश पांडे के बेटे भीष्म पांडे को क्रमश: इंस्पेक्टर और नायब तहसीलदार बनाने को कैप्टन सरकार ने मंजूरी दी थी।
मामले में एडवोकेट विक्रमजीत बाजवा ने सोमवार को जनहित याचिका दायर कर कहा कि पंजाब में हजारों युवा सरकारी नौकरी की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन सरकार उन्हें छोड़ कर सिर्फ अपने चहेतों को ही सरकारी नौकरी देने में लगी है। कई शहीदों के बच्चों से सरकार ने कहा कि ग्रुप-सी और डी की पोस्ट नहीं है, लेकिन विधायकों के बेटों को नौकरी दी जा रही है। जल्द ही इस याचिका पर सुनवाई हो सकती है।
प्रताप ने भाई से की अपील: प्रताप सिंह बाजवा ने अपने भाई फतेहजंग बाजवा और विधायक राकेश पांडे से अपील की है कि वे कैबिनेट की ओर से उनके बच्चों को दी जा रही नौकरी का प्रस्ताव लौटा दें। बाजवा ने कहा कि उनके पिता सतनाम सिंह बाजवा और राकेश पांडे के पिता व पूर्व मंत्री जोगिंदर पाल पांडे ने एकता और अखंडता के लिए जान दी।
शहीदों के स्वजन भी खफा: शहीदों के स्वजन ने उनके आवेदनों को बिना किसी कारण रद किए जाने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह पर तीखा हमला बोला है। 29 वर्षीय रंजीत भुल्लर ने जागरण को बताया कि आज जब हम पूरी योग्यता रखते हैं तो नौकरी नहीं दी जा रही है।


