नई दिल्ली : भारत में प्रचलित कोविड महामारी से बचाव की वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन सार्स-कोरोना वायरस-2 के वैरिएंट अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा पर प्रभावी हैं। उनसे होने वाले संक्रमण की गंभीरता को कम करने में सक्षम हैं। यह बात भारत सरकार ने कही है।
देश में अभी तक कोविड-19 महामारी के लिए जिम्मेदार वायरस के अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा वैरिएंट के मामले बड़ी संख्या में पाए गए हैं।
इस समय इससे आगे के डेल्टा प्लस वैरिएंट को लेकर देश में चिंता का माहौल बन रहा है। देश में इस वैरिएंट के वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या अभी कम है लेकिन यह बढ़ती जा रही है।
शुक्रवार को प्रेस वार्ता में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा, दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आ रही खबरों के मुताबिक विभिन्न वैक्सीन की वायरस के नए वैरिएंट को निष्प्रभावी करने की क्षमता घटती जा रही है।
लेकिन कोवैक्सीन के साथ ऐसा नहीं है। डेल्टा वैरिएंट पर भी कोवैक्सीन प्रभावी है लेकिन एंटीबॉडी कुछ कम पैदा होती देखी गई हैं।
कोविशील्ड वैक्सीन लगवाने वालों में भी एंटीबॉडी पैदा होने का यह अंतर दिखाई दे रहा है। बावजूद इसके दोनों वैक्सीन कोरोना वायरस के अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा वैरिएंट को निष्कि्रय करने में कामयाब हैं।
भार्गव ने कहा, कोरोना वायरस का डेल्टा प्लस वैरिएंट अब तक दुनिया के 12 देशों में पाया गया है। भारत में इस वायरस के दस राज्यों में 48 मरीज सामने आए हैं। लेकिन इनसे ज्यादा संक्रमण फैलता नहीं पाया गया है।
जबकि डेल्टा वैरिएंट अक्टूबर 2020 में पहली बार महाराष्ट्र में पाया गया था। फरवरी में पाया गया कि महाराष्ट्र में 60 प्रतिशत मामले इसी वैरिएंट के थे। यह वैरिएंट दुनिया के 80 देशों में अभी तक पाया गया है। –


