कैसे निकलेगी सुलह की राह! पैनल से नहीं मिलेंगे सिद्धू, राहुल गांधी करेंगे असंतुष्ट नेताओं से मुलाकात

चंडीगढ़ : कांग्रेस में अंतर्कलह का समाधान ढूंढ़ने में जुटे राहुल गांधी ने अब पंजाब के नेताओं से सीधा संवाद शुरू कर दिया है।पहले उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा से मुलाकात की थी, जबकि शुक्रवार को राहुल ने दो हिस्सों में मंत्रियों व विधायकों से चर्चा की।

राहुल ने नेताओं के मन को पढ़ने की कोशिश की। उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर भी सवाल पूछे।

इस पर एक विधायक ने साफ-साफ कह दिया कि कैप्टन और सिद्धू एक नाव पर सवार नहीं हो सकते। कैप्टन के बगैर काम चल नहीं सकता। सिद्धू को कैसे और कहां एडजस्ट करना है, उस पर विचार कर लें। अहम बात यह रही कि शुक्रवार को राहुल गांधी के साथ हुई मुलाकात के दौरान सिद्धू को समर्थन नहीं मिल पाया।

यहां तक कि राज्यसभा सदस्य शमशेर सिंह दूलो ने भी राहुल गांधी से कह दिया कि आज जो लोग दलितों की बात कर रहे हैं, उन्हें तब दलितों की याद क्यों नहीं आई जब जहरीली शराब पीकर 126 लोगों की मौत हो गई थी। उनमें से अधिकांश दलित थे। सिद्धू तो अमृतसर के ही विधायक थे।

सबसे ज्यादा मौतें भी वहीं हुई, लेकिन सिद्धू ने कोई आवाज नहीं उठाई। दूलो ने पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप घोटाले का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में सवाल उठाने के बाद केंद्र सरकार ने एससी विद्यार्थियों के लिए 303 करोड़ रुपये का फंड भेजा। इसमें से भी 64 करोड़ रुपये का घोटाला हो गया।

वहीं, राज्यसभा सदस्य ने टकसाली कांग्रेसियों के मान-सम्मान को बहाल करने व उन्हें तरजीह देने पर भी जोर दिया। दूलो ने कहा, ‘मैंने राहुल जी के सामने सारी बातें रख दी हैं। अब उन्हें देखना है कि आगे क्या फैसला लेना है।

पहले चरण में शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला, राणा गुरजीत सिंह, लखबीर लक्खा, बलविंदर सिंह शेरोवाली आदि ने मुलाकात की, जबकि दूसरे चरण में स्थानीय निकाय मंत्री ब्रह्मा मोहिंदरा, सुखविंदर सिंह डैनी, कैप्टन संदीप संधू आदि शामिल रहे।

वहीं, कांग्रेस के सीनियर नेता व मंडी बोर्ड के चेयरमैन लाल सिंह भी राहुल गांधी से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि उनकी राहुल गांधी से मुलाकात हुई या नहीं।

सिद्धू ने खराब किया माहौल : एक विधायक ने राहुल गांधी से कहा कि दो महीने पहले तक पंजाब में सरकार का कोई विरोध नहीं था, लेकिन सिद्धू ने सरकार के खिलाफ बोल-बोल कर माहौल खराब कर दिया।

सिद्धू खुद को शो पीस बता रहे हैं, तो क्या इससे पहले कांग्रेस सिद्धू के दम पर जीतती आई है? विधायक का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई विधायकों ने सीएम के कामकाज पर तो सवाल उठाया, लेकिन सिद्धू को स्वीकार नहीं किया।

सबकी राय जानना चाहते हैं राहुल : पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, राहुल गांधी पंजाब को लेकर काफी हद तक अपना मन बना चुके हैं, लेकिन फिर भी अंतिम फैसला लेने से पहले वह सभी नेताओं से बातचीत कर उनकी राय जानना चाहते हैं, ताकि फैसले के बाद कोई सवाल न उठे। यही कारण है कि वह पंजाब के नेताओं से कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़ और नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर सवाल पूछ रहे हैं।

Share this with Your friends :

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter