लखनऊ : समाजवादी पार्टी ने उप्र में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा पर शासन व सत्ता का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। सपा ने कहा कि राज्य सरकार ने शनिवार को 12 जिलों में उसके प्रत्याशियों को नामांकन तक नहीं करने दिया। पार्टी ने शनिवार शाम राज्य निर्वाचन आयोग में इसकी शिकायत की है।
सपा नेताओं ने कहा कि सरकार के इशारे पर पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं ने सपा कार्यकर्ताओं और नेताओं को मारा-पीटा। जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण किया गया।
समाजवादी पार्टी के एमएलसी उदयवीर सिंह व राष्ट्रीय सचिव राजीव राय ने राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार से मिलकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। सपा ने निर्वाचन आयोग में ज्ञापन देने के बाद पत्रकारों से कहा कि गोरखपुर में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को पुलिस और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने मिलकर पीटा है।
बलरामपुर में सपा प्रत्याशी को पुलिस गाड़ी में बैठाकर घुमाती रही। नामांकन का समय खत्म होने पर तीन बजे जंगल में छोड़ दिया। सपा का आरोप है कि प्रदेश भर में कई जगहों पर उसके प्रत्याशियों और जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण किया गया।
कई जिलों में आवेदक, प्रस्तावक या सदस्यों को नामाकंन स्थल तक नहीं पहुंचने दिया गया। कई जिला पंचायत सदस्यों को पुलिस ने घर से उठाकर कहीं दूर सड़क पर तो कहीं जंगल में ले जाकर छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार लगातार लोकतंत्र की हत्या कर रही है।
भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में गोरखपुर, झांसी, मुरादाबाद, भदोही, चित्रकूट, श्रावस्ती, बलरामपुर, हमीरपुर, गोंडा, मऊ, ललितपुर, गाजियाबाद में सपा प्रत्याशियों को नामांकन तक दाखिल नही करने दिया। सरकार सपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों को डरा-धमकाकर एफआइआर दर्ज करा रही है। स्वजन को प्रताड़ित कर रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा किसी तरह से प्रशासन, गुंडे और माफियाओं के सहारे अलोकतांत्रिक तरीके से जिला पंचायतों पर कब्जा करना चाहती है। सपा ने 11 जिलाध्यक्ष हटाए समाजवादी पार्टी ने नामांकन न कर पाने का ठीकरा अपने जिलाध्यक्षों पर फोड़ा है।
पार्टी ने सबसे पहले 11 जिलाध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने गोरखपुर, मुरादाबाद, झांसी, आगरा, गौतमबुद्धनगर, मऊ, बलरामपुर, श्रावस्ती, भदोही, गोंडा व ललितपुर के जिलाध्यक्ष को हटा दिया है।
ऐसा माना जा रहा है कि इन जिलों में सपा संगठन कमजोर था, इस कारण पुलिस व प्रशासन ने सपा प्रत्याशियों को नामांकन करने नहीं दिया। सूत्रों के अनुसार पार्टी का मानना है कि यदि संगठन मजबूत होता और अधिक संख्या में कार्यकर्ता मौके पर होते तो स्थितियां दूसरी होतीं।


