प्राचीन जिंदपीर बाबा की दरगाह पर हुआ कब्बालियों का आयोजन
सेवढ़ा. पुराने सेवढ़ा में स्थित जिंदपीर बाबा की दरगाह पर गुरूवार को कब्बाली का आयोजन किया गया। कब्बाली टीम द्वारा हर दर्द की दवा है मोहम्मद के शहर में… एवं भरदे झोली मेरी या मोहम्मद जैसी प्रचलित कब्बाली श्रोताओं द्वारा खूब सराही गई। इसके अलावा समाजसेवी कार्यकर्ताओं ने प्रसादी का वितरण भी किया।

नगर से तीन किलोमीटर दूर पुराना सेवढ़ा है। यहां सिद्ध औलिया बाबा जिंदपीर की दरगाह बनी हुई है। सदियों पुराने इस स्थान को लेकर िहंदू मुस्लिम दोनों की गहरी आस्था है। इसीलिए इस स्थल को साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। यहां लोग मन्नत की गठान बांधते हैं और उनके पूरे होने पर चादर चढ़ाई जाती है। चारों ओर से घने जंगल और ऊंची पहाडी पर बने इस प्राचीन स्थल पर गुरूवार को साप्ताहिक मेले का आयोजन हुआ। इस अवसर पर लाला खान एवं जमीन मिर्जा के नेतृत्व में यहां कब्बाली का आयोजन किया गया। कब्बाल मख्खू खां, शहादत खां, सपरू खान, समीर, सलमान, शाहरूख, अरमान खान ने एक दर्जन से अधिक कब्बाली एवं गीत सुनाए । जो कि मौजूद लोगों ने जमकर सराहे । इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता रसीद मिर्जा, सावन वैद्य, फिरोज खान, फरमान खान आदि द्वारा बाबा की दरगाह का प्रसाद भी वितरित किया गया। कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक चला। इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग दरगाह पर पहुंचे। बतादें कि दरगाह के पास बड़ा दरबाजा स्थित है जो कि यहां सदियों पहले स्थित महल की निशानी के तौर पर देखा जाता है। दरगार के प्राचीन स्वरूप को बनाए रखते हुए फिलहाल इसके जीर्णोंद्धार का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल यहां बिजली पानी की उपलब्धता नहीं है बावजूद इसके लोग दिन में यहां दर्शन करने के लिए काफी संख्या में आते जाते है।

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