कविता प्रसंग का हुआ आनलाइन आयोजन नेपाल, श्रीलंका की कवियत्रियों ने किया रचना पाठ

दतिया । मेरे अक्षरों की संवेदना तेरे भाव जगाते हैं, तभी तो पन्नो पर तेरे आंसू छलक आते हैं। उक्त पंक्तियां श्रीलंका की सुप्रसिद्ध कवियत्री डा.अंजलि मिश्रा ने मधुकर शोध संस्थान दतिया द्वारा आयोजित कविता प्रसंग आनलाइन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में सुनाई। उन्होंने अपने उद्बोधन में दतिया को सांस्कृतिक एवं साहित्यिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाला शहर बताया। साथ ही मधुकर मिश्र के कार्यों पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. रीता दासराम मुंबई ने की। संचालन लखनऊ से स्वाति पाठक द्वारा किया गया। आनलाइन आयोजन सशक्त नारी विषय को लेकर सम्पन्न हुआ। जिसमें भारत सहित नेपाल, श्रीलंका के रचनाकारों ने सहभागिता की। कार्यक्रम की शुरुआत डा.रीता दास द्वारा दीप प्रज्ज्वलित एवं भाटापारा से वंदना शर्मा शैली की सरस्वती वंदना से हुई। रचनाकारों में भोपाल की शायरा ओरीना अदा ने सुनाया मुहब्बत का होगा असर धीरे धीरे, बनेगा वो मेरा मगर धीरे धीरे। इसके वाद अंबाला से सुषमा शर्मा दीया ने कहा- वो ज़ख़्म दीवार का जिसे कहते हैं रोशनदान, छलनी कर गया कलेजा बींधकर दीवार को।

काव्य की इसी श्रृंखला में डा. शीरीन कुरैशी ने पढ़ा कि आओ एक अलख जगाए मेरे हिंदुस्तान में। आओ नारी का अस्तित्व बचाए मेरे हिंदुस्तान में। भाटापारा छग से वंदना गोपाल शर्मा शैली ने अपनी रचना सुनाते हुए कहाकि वे अजन्मी संतानें जिन्हें जन्म से पूर्व उनकी ही माताओं ने मार दिया, क्या वे दुर्भाग्य शालिनी थी? बताओ न मां, के माध्यम से बालिका पीड़ा का वर्णन किया। नेपाल की साहित्यकार डा. उषा तिवारी ने कहा-चांदनी ने कहा चाहतों की कसम, धूप है छांव है ज़िंदगानी सनम। आसमां ने कहाकि प्यार के गांव में, हम अकेले रहे और था चंद ग़म सुनाया।

कार्यक्रम में जिया हिंडवाल गीत उत्तराखंड, स्वाति पाठक लखनऊ, चेतना कपूर गाजियाबाद दिल्ली ने अपना रचना पाठ किया। कार्यक्रम में संयोजक विनोद मिश्र ने सभी का आभार व्यक्त किया। मधुकर शोध संस्थान का यह अनूठा आयोजन श्रृंखला बद्ध आगे संचालित होगा। कार्यक्रम में आनलाइन दर्शक के रूप में ऋषिराज मिश्र, अरुण सिद्ध, आरती ठाकुर मुंबई, वर्षा शर्मा, वसुंधरा राय, अमिरित सिंह, दीपक वर्मा, साधना गुप्ता, अखिलेश यादव, कंचन यादव, रजनीश कुमार ने सहभागिता की।

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