लखनऊ : कोरोना के नए वेरिएंट डेल्टा प्लस ने उत्तर प्रदेश के लोगों की भी चिंता बढ़ा दी है। इस वेरिएंट से संक्रमित दो रोगी प्रदेश में मिले हैं। इनमें एक की मौत हो चुकी है जबकि दूसरा ठीक हो चुका है।
इन दोनों के संपर्क में आए लोगों समेत करीब 100 से ज्यादा लोगों की जीनोम सीक्वेंसिंग में नया वैरिएंट नहीं मिला है। बुधवार को इंस्टीट्यूट आफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलाजी (आइजीआइबी), नई दिल्ली से जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट आने के बाद सभी जिलों को अलर्ट कर दिया गया है। खासकर नेपाल की सीमा से सटे जिलों में विशेष सर्तकता बरती जा रही है।
देश के कई राज्यों में कोरोना के नए वेरिएंट डेल्टा प्लस मिलने के मामले पहले ही सामने आ चुके हैं। प्रदेश में यह पहला मामला है। जिन दो मरीजों में कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट की पुष्टि हुई है, उनमें से एक देवरिया व दूसरा गोरखपुर का निवासी है। देवरिया निवासी 66 वर्षीय बुजुर्ग की 29 मई को मौत हो चुकी है।
उनका सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा गया था, जिसमें डेल्टा प्लस की पुष्टि हुई। उनके घर के सभी छह सदस्यों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। उनमें डेल्टा प्लस नहीं मिला है। गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कालेज की 23 वर्षीय रेजीडेंट डाक्टर बीती 26 मई को कोरोना से संक्रमित हुई थीं। जीनोम सीक्वेंसिंग में उनके सैंपल में भी डेल्टा प्लस वेरिएंट मिला।
महिला रेजीडेंट डाक्टर होम आइसोलेशन में ही स्वस्थ हो चुकी हैं। जिन दो मरीजों में इस वैरिएंट की पुष्टि हुई है, उनकी आरटीपीसीआर जांच गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में हुई थी। दोनों मरीजों के संपर्क में आने वालों समेत 100 लोगों के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए दिल्ली भेजे गए थे। इनमें किसी में भी डेल्टा प्लस नहीं मिला है।
अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि सभी जिलों को अलर्ट किया गया है। मालूम हो कि कोरोना का डेल्टा प्लस वेरिएंट ज्यादा खतरनाक है। यह रोगी की इम्युनिटी को भी कमजोर कर उसे चकमा दे देता है। इससे संक्रमित व्यक्ति को गंभीर रूप से खांसी, जुकाम व सर्दी, गले में खराश व नाक बहने आदि के लक्षण देखने को मिलते हैं।
केजीएमयू में 3200 सैंपल पहुंचे, अब तक नहीं मिला डेल्टा प्लस उत्तर प्रदेश सरकार ने कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट की आशंका को देखते हुए लखनऊ के केजीएमयू, डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, सीडीआरआइ, एनबीआरआइ, चाइल्ड पीजीआइ व जिम्स में जांच की व्यवस्था की है। केजीएमयू में जांच के लिए 3200 सैंपल पहुंच चुके हैं। अब तक जो जांच हुई है उनमें किसी में भी डेल्टा प्लस नहीं मिला है।

