अमरिंदर सिंह सरकार और सब्सिडी देने के मूड में नहीं, 200 यूनिट फ्री बिजली देना मुश्किल

चंडीगढ़ : पंजाब में बिजली सब्सिडी आगामी विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनती दिख रही है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली माडल को लेकर रक्षात्मक रवैया अपना रही कैप्टन सरकार जल्द ही आक्रामक रुख अख्तियार कर सकती है।

हालांकि सरकार अभी 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने या न देने को लेकर किसी निर्णय पर नहीं पहुंची है। इस पर फैसले के लिए मुख्यमंत्री जल्द ही कैबिनेट की बैठक बुला सकते हैं। 

मालूम हो कि दस दिन पहले पंजाब के हर घर को दो सौ यूनिट निश्शुल्क देने के कांग्रेस हाई कमान के फैसले को लागू करने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पावरकाम के अधिकारियों से डाटा मांगा था। इसमें यह बात सामने आई कि मुफ्त बिजली और सब्सिडी देने में पंजाब दिल्ली से आगे है।

राज्य में 40 लाख उपभोक्ताओं को यह सुविधा मिल रही है। सूत्रों के अनुसार सरकार में चर्चा हो रही है कि अब और ज्यादा सब्सिडी देने की जरूरत नहीं है। यही कारण है कि हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की बात आगे नहीं बढ़ पा रही है।

बिजली विभाग ने इस पर तीन से चार हजार करोड़ रुपये का बजट बताया है, जो सरकार की मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए संभव नहीं है। कारण यह कि राज्य सरकार पहले ही 10434 करोड़ रुपये बिजली सब्सिडी पर खर्च कर रही है।

दिल्ली से सस्ती है पंजाब में बिजली -दिल्ली और पंजाब की तुलनात्मक रिपोर्ट में पावरकाम के अधिकारियों ने दावा किया है कि दिल्ली में कामर्शियल बिजली पंजाब की तुलना में साढ़े तीन रुपये प्रति यूनिट महंगी है। पंजाब में इसकी दर 7.97 रुपये प्रति यूनिट है तो दिल्ली में 11.34 रुपये प्रति यूनिट है।

पंजाब में सालाना 467130 लाख यूनिट बिजली बेचकर 29903 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है। इसके मुकाबले दिल्ली में 274360 लाख यूनिट बेचकर 20556 करोड़ रुपये राजस्व मिलता है।

यानी पंजाब को प्रति यूनिट औसत 6.40 रुपये जबकि दिल्ली को प्रति यूनिट 7.49 रुपये मिलते हैं। -पंजाब सरकार बिजली पर 10458 करोड़ रुपये तो दिल्ली सरकार 2820 करोड़ रुपये की सब्सिडी देती है।

यानी पंजाब सरकार सब्सिडी पर 2.24 रुपये जबकि दिल्ली सरकार 1.03 रुपये प्रति यूनिट खर्च कर रही है। सब्सिडी निकालकर पंजाब को 19445 करोड़ रुपये तो दिल्ली को 17336 करोड़ रुपये राजस्व मिलता है।

बिजली खरीद समझौतों पर मांगी कानूनी राय पंजाब सरकार ने 2007 से लेकर 2017 के बीच में किए गए बिजली खरीद समझौतों को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है।

सरकार ने पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा से जीवीके थर्मल पावर प्लांट गोइंदवाल साहब, दामोदर वैली कारपोरेशन और नेशनल थर्मल पावर प्लांट के साथ किए गए बिजली खरीद समझौतों पर कानूनी राय मांगी है।

सरकार ने पूछा है कि क्या इन कंपनियों के साथ बिजली खरीद दरों व अन्य शर्तों को लेकर फिर से बातचीत की जा सकती है या नहीं।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री को जिस 18 सूत्रीय कार्यक्रम पर अमल करने को कहा है, उसमें बिजली समझौते भी शामिल हैं।

सरकार जल्द ही इनके इकरारनामे पार्टी हाईकमान के पास भेजकर उनसे भी अपनी लीगल टीम से राय लेने की अपील करेगी कि क्या यह समझौते पुनर्विचार करने के काबिल हैं? क्या ऐसा करने से सरकार पर कोई वित्तीय बोझ तो नहीं पड़ेगा? 

बिजली कट से परेशान किसान ने दी जान जासं, श्री मुक्तसर साहिब : जिले के लंबी में बिजली संकट के कारण धान की फसल सूखने से परेशान होकर गांव माहूआना के 35 वर्षीय किसान बलजीत सिंह ने खेत में ही टाहली के पेड़ से फंदा लगा लिया।

साले जगमीत सिंह ने बताया कि बलजीत के पास करीब चार एकड़ जमीन है। वह करीब 20 एकड़ जमीन को ठेके पर लेकर खेती करता था।

उस पर करीब 25 लाख रुपये का बैंक कर्ज था। बिजली संकट के कारण पानी नहीं दे पाने से धान की फसल सूख गई थी, जिससे वह परेशान था। 

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