नई दिल्ली : संसद के 19 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र से पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को प्रोन्नत करके राज्यसभा में नेता सदन नियुक्त किया गया है। वह थावर चंद गहलोत का स्थान लेंगे जिन्हें कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
राज्यसभा में भाजपा के पास बहुमत नहीं है, ऐसे में सरकार का विधायी एजेंडा पूरा करने के लिए उन्हें कई राजनीति चुनौतियों से निपटना होगा।
उनकी नियुक्ति की घोषणा करते हुए संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने उन्हें नई भूमिका के लिए शुभकामना दी।अभी तक पीयूष गोयल राज्यसभा में उपनेता की जिम्मेदारी भी निभा रहे थे।
सदन के नेता के रूप में नियुक्ति से भाजपा में उनका राजनीतिक कद बढ़ा है क्योंकि इस पद पर कभी जसवंत सिंह और अरुण जेटली जैसे दिग्गज रह चुके हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा, ‘मुझे विश्वास है कि पीयूष भाई अपने समर्पण, क्षमताओं व ऊर्जा से राज्यसभा में भाजपा की बुलंद आवाज बनेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीबों के कल्याण के लिए कार्य संकल्प को मजबूत करेंगे।’ 57 वर्षीय पीयूष गोयल 2010 से राज्यसभा के सदस्य हैं।
उनके पास वाणिज्य एवं उद्योग, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों और कपड़ा समेत विभिन्न मंत्रालयों का प्रभार है। 2014 में केंद्रीय मंत्री बनने से पहले पीयूष गोयल पार्टी के कोषाध्यक्ष थे।
समाचार एजेंसी ‘एएनआइ’ के मुताबिक, वह 1984 से भाजपा से जुड़े हैं और संगठन के विभिन्न पदों पर रह चुके हैं। वह पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के भी सदस्य हैं।
2014 के लोकसभा चुनाव में वह पार्टी की सूचना संवाद प्रचार समिति के प्रमुख थे और पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी की घोषणापत्र एवं प्रचार समिति के सदस्य थे।
चार्टर्ड अकाउंटेंट की परीक्षा में उन्होंने देशभर में दूसरी रैंक और मुंबई यूनिवर्सिटी में कानून में दूसरी रैंक हासिल की थी। वह एक इंवेस्टमेंट बैंकर भी रहे हैं और भारतीय स्टेट बैंक और बैंक आफ बड़ौदा के बोर्ड में रह चुके हैं।


